सन्त कबीर जयंती 2022 Sant kabeer jayanti 2022
सन्त कबीर जयंती 2022 Sant kabeer jayanti 2022
हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख सन्त कबीर जयंती 2022 (Sant kabeer jayanti 2022) में।
दोस्तों यहाँ पर आप संत कबीर की जयंती उत्सव तथा उनकी शिक्षाओं के बारे में जानेंगे, तो आइये शुरू करते है, यह लेख सन्त कबीर जयंती 2022:-
सूरदास पर निबंध Essay on Soordas
कबीर दास कौन थे Who was kabeerdas
भारत देश में ऐसी कई महान आत्माओं ने जन्म लिया है, जिन्होंने भारत में फैली बुराइयों को दूर कर भारतीयों को प्रेम और दया के सूत्र में पिरोने की बार-बार कोशिश की है। उनमें से ही एक सन्त है 'महात्मा कबीर' कबीर दास सम्पूर्ण विश्व में एक प्रसिद्ध संत, समाज सुधारक तथा महान कवि के रूप में जाने जाते है,
जिन्होंने अपने जीवन में पाखंड, मूर्ति पूजा, अंधविश्वास का घोर विरोध किया। संत कबीर दास ने ईश्वर अल्लाह दोनों को एक कहा। उनका जन्म ऐसे समय हुआ जब समाज में जात - पात, छुआ-छूत, पाखंड आडम्बर मूर्ति पूजा का बोलबाला था। भक्ति काल में जन्मे कबीर दास जी ईश्वर के एक परम भक्त थे, जिन्होंने भक्ति आंदोलन में अपना अमूल्य सहयोग दिया था।
भक्ति आंदोलन के द्वारा ही कबीर दास जी ने पाखंड अंधविश्वास, कुरीतियाँ का डटकर विरोध किया कभी वे खुद को मुसलमान तो कभी हिन्दु और राम का बच्चा बताते थे। कबीरदास एक छोटी जुलाहा जाति के थे, इसलिए उन्हें हिंदू और मुसलमान दोनों ने ही बहुत प्रताड़ित किया था,
लेकिन कबीरदास जी हिंदू और मुसलमान दोनों को ही अपना भाई मानते थे और कहते थे, ईश्वर एक है जिनका नाम अल्लाह और राम है। कबीरदास वेद, धर्म के ज्ञाता थे उन्होंने किसी से शिक्षा नहीं ली,
किन्तु अपना गुरु रामानंद को बनाया जिन्होंने कबीरदास जी को दास जोड़कर उनका नाम कबीरदास कर दिया। कबीर दास जी ने अपने काव्य के माध्यम से निर्गुण ब्रह्म की स्तुति जन-जन तक पहुँचाने की कोशिश की।
कबीर दास जी का विवाह हुआ और उनकी दो संतानें हुई, जिनका नाम कमाल और कमाली था। कबीर दास घर गृहस्थी चलाने के लिए जुलाहे का काम किया करते थे, और भगवान का भजन करते हुए 120 वर्ष की आयु में परलोक सिधार गए।
कबीर जी की जन्म कथा Birth Story of kabeerdas
कबीर जी की जन्म कथा कई इतिहासकारों और विद्वानों ने अलग - अलग बताई है। कुछ विद्वान कहते है, कि कबीर दास को एक विधवा ब्राह्मणी ने जन्म दिया था और लोक लाज से बचने के कारण उस विधवा ब्राह्मणी ने कबीर दास जी को काशी में लहरतारा
नामक तालाब के किनारे रख दिया था, किंतु कुछ विद्वानों का मानना है, कि कबीर दास जी का जन्म ही नहीं हुआ था बल्कि कबीर दास जी का अवतार हुआ था वे लहरतारा में एक कमल के फूल पर अवतरित हुए थे,
इसलिए कबीर दास जी भगवान के अवतार माने जाते है। साधारण तौर पर सभी विद्वान् मानते है, कि कबीर दास जी का जन्म 1398 काशी में हुआ था। जब काशी के लहरतारा नामक तालाब के पास से एक मुस्लिम नि:संतान दंपत्ति भीरू और नीमा गुजर रहे थे,
तब उनकी दृष्टि बालक कबीर पर पड़ी है और वह उसे अपने घर ले आए। कबीर दास जी बचपन से ही भगवान श्री राम का भजन करते थे, और उन्हें अपना सब कुछ मानते थे। वे ईश्वर और अल्लाह को एक ही भगवान मानते थे और हिन्दु मुस्लिमो को एक साथ भाईचारे के साथ रहने की सीख देते थे।
सन्त कबीर जयंती 2022 Sant kabeer jayanti 2022
सन्त कबीर निर्गुण काव्यधारा के कवि तथा एक समाज सुधारक थे, जिन्होंने समाज के कल्याण तथा शांति के लिए अपने जीवन में कई कठिन कार्य किये किन्तु लोगो द्वारा प्रताड़ित भी किये गए। कबीरदास जी ने पाखंड, मूर्ति पूजा, आडंबर का घोर विरोध किया है,
जबकि भाईचारा प्रेम शांति दया करुणा को महत्व दिया है। उन्होंने हिंदू और मुसलमान दोनों को ही एक ही परमात्मा की संतान बताया है, उन्होंने कहा है, कि अल्लाह और राम दोनों ही एक हैं, इसीलिए हिंदू और मुसलमान को एक साथ भाई चारे के साथ रहना चाहिए।
ऐसे महान संत कबीर की जयंती 2022 में 14 जून को जेष्ठ मास की पूर्णिमा को है, जो पूरे देश में बड़े ही आदर और गर्व के साथ मनाई जाती है। संत कबीर दास की जयंती हिंदू और मुसलमान दोनों ही मनाते हैं। जब संत कबीर की मृत्यु हुई थी
तब हिंदू और मुसलमानों में इस बात के बीच झगड़ा उत्पन्न हो गया था कि वे संत कबीर दास के शव को दफनाएंगे और हिंदू संत रविदास के शव को जलाएंगे तब आकाशवाणी हुई की शव से कफन को हटाया जाए और जैसे ही शव से कफन को हटाया गया
तब वहां पर संत कबीर दास का मृत शरीर नहीं था मृत शरीर की जगह पर फूल ही फूल थे। आकाशवाणी फिर हुई संत कबीर हिंदू और मुसलमान दोनों से ही प्रेम करते है, इसलिए आधे फूल मुसलमान ले जाएँ और आधे हिन्दु तथा अपनी-अपनी रीति रिवाज के अनुसार उनका अंतिम संस्कार करें
और भाई चारे के साथ जीवन व्यतीत करें। ऐसे महान संत तथा समाज सुधारक की जयंती पूरे देश में बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाई जाती है। भारत देश में कई स्थानों पर संत कबीर दास के मंदिर भी है,
जहाँ हिंदू और मुसलमान दोनों ही एक साथ मिलकर संत कबीर दास जी की जयंती मनाते हैं, मंदिर को सजाते है, उनकी आरती होती है तथा कबीरदास जी की ज्ञान और नीति के दोहे और उनका महत्व लोगों को बताया जाता है। संत कबीरदास जयंती पर प्रमुख विचारक तथा विद्वान संत कबीर दास के
महान वचन लोगों को सुनाते हैं, उनका अर्थ बताकर उनको अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा देते है, क्योंकि कबीर दास जी ने ऐसे दोहों को रचा है, जिनका जीवन में उपयोग करने से जीवन शांत, सरल,तथा
सुखमय बनता है। संत कबीर दास जयंती पर कई जगह शोभा यात्राएँ और जुलूस भी निकाले जाते हैं, सरकारी विभागों में बड़े हर्ष और उल्लास के साथ कबीर दास की जयंती मनाई जाती है।
कबीरदास के दोहे Kabeerdas ke dohe
कबीरदास जी की मुख्य रचना बीजक है जिसके तीन भाग हैं साखी सबद और रमैनी, जिन के कुछ प्रमुख दोहे यहां पर दिए गए हैं:-
माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रौंदे मोय।
एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूगी तोय॥
साईं इतना दीजिए, जा मे कुटुम समाय।
मैं भी भूखा न रहूं, साधु ना भूखा जाय॥
माया मरी न मन मरा, मर-मर गए शरीर।
आशा तृष्णा ना मरी, कह गए दास कबीर॥
दुःख में सुमिरन सब करें सुख में करै न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे तो दुःख काहे होय॥
बडा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दूर॥
काल करे सो आज कर, आज करे सो अब ।
पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब ।।
गुरु गोविंद दोऊ खड़े ,काके लागू पाय ।
बलिहारी गुरु आपने ,गोविंद दियो मिलाय।।
ऐसी वाणी बोलिए मन का आप खोये।
औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए।।
जाती न पूछो साधू की, पूछ लीजिये ज्ञान ।
मोल करो तलवार का, पड़ा रहने दो म्यान ।।
मलिन आवत देख के, कलियन कहे पुकार ।।
फूले फूले चुन लिए, कलि हमारी बार ।
दोस्तों आपने यहाँ सन्त कबीर जयंती 2022 (Santa kabeer jayanti 2022) तथा उनके बारे में पढ़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।
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