परशुराम किस जाति के थे Parshuram kis jati ke the
परशुराम किस जाति के थे Parshuram kis jati ke the
हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख परशुराम किस जाति के थे (Parshuram kis jati ke the) में। दोस्तों यहाँ पर आप परशुराम
किस जाति के थे के साथ ही परशुराम कौन थे? परशुराम के माता पिता का नाम पत्नी का नाम तथा जन्म कथा पड़ेंगे। तो आइये शुरू करते है, यह लेख परशुराम किस जाति के थे।
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परशुराम कौन थे Who was parshuram
इस पृथ्वी पर समय-समय पर कई दिव्य आत्माओं तथा स्वयं श्रीहरि विष्णु मानव जाति का कल्याण तथा अधर्म और पाप से मुक्ति दिलाने के लिए जन्म लिया है। भगवत गीता में भी कहा गया है, जब-जब धर्म की हानि होती है तब तब भगवान पृथ्वी पर अवतरित होते हैं।
ऐसे ही एक भगवान है 'परशुराम' परशुराम भगवान को भगवान विष्णु का छठवाँ अवतार माना जाता है। भगवान विष्णु ने परशुराम के रूप में धरती पर अवतार एक ब्राह्मण पुत्र के रूप में लिया था
और उनका असली नाम राम था। भगवान परशुराम का जन्म वैशाख शुक्ल तृतीया को मध्यप्रदेश के इन्दौर जिला में ग्राम मानपुर के जानापाव पर्वत पर हुआ था।
इनके पिता का नाम महर्षि जमदग्नि और माता का नाम रेणुका था। भगवान परशुराम की शिक्षा दीक्षा महर्षि विश्वामित्र के साथ ही ऋषि ऋचीक और भगवान शिव जी के सानिध्य में संपन्न हुई
इसीलिए वे सभी विद्याओं और शस्त्र विद्याओं में पारंगत हो गए। उन्हें भगवान शिव ने परशु नामक अस्त्र प्रदान किया इसलिए परशु धारण करने के कारण उन्हें परशुराम कहा जाने लगा।
परशुराम के पिता कौन थे Who was father of parshuram
विष्णु भगवान के छठवें अवतार भगवान परशुराम महापराक्रमी और महा क्रोधी जन्म से ब्राह्मण थे, जिनके पिता का नाम महर्षि जमदग्नि था जो शांत स्वभाव के ऋषि और भगवान शिव के परम भक्त भी थे।
उनके पिता का नाम महर्षि ऋचीक तथा माता सत्यवती थी, जबकि दादाश्री महर्षि भृगु थे, जो कई मत्रों के रचयिता त्रिदेवों की परीक्षा लेने वाले सप्तऋषियों में से एक थे।
परशुराम किस जाति के थे Parshuram kis jati ke the
परशुराम ने माता रेणुका के गर्भ से जन्म लिया था। माता रेणुका राजा प्रसेनजित, जिनका एक नाम रेणु भी था की पुत्री थी, जिनका विवाह ऋषि ऋचीक तथा सत्यवती के पुत्र जमदग्निसे हुआ था,
जो स्वयं महर्षि भृगु के पौत्र थे इसलिए परशुराम जन्म से ब्राह्मण जाति के थे, जबकि उनका गोत्र भार्गव था, किंतु अपने कर्मों के द्वारा वह क्षत्रिय भी कहे जाने लगे थे।
परशुराम के कितने पुत्र थे Parshuram ke kitne putra the
भगवान परशुराम स्वभाव से बड़े ही क्रोधी व्यक्ति थे और अपने पिता की आज्ञा का पालन किया करते थे। भगवान परशुराम अपनी पिता की ही तरह भगवान शिव के अनन्य भक्त थे. भगवान परशुराम के विवाह का उल्लेख किसी भी पौराणिक ग्रंथ में नहीं मिलता है,
किंतु कहीं-कहीं पर उनकी प्रेमिका अनामिका का उल्लेख दिखाई देता है। अनामिका की मृत्यु सहस्त्रार्जुन के पुत्रों के कारण हो जाने के बाद भगवान परशुराम ने सहस्त्रार्जुन और उनके पुत्रों को समाप्त कर दिया, किंतु विवाह कभी नहीं किया और ब्रह्मचारी के रूप में रहे इसलिए भगवान परशुराम की कोई भी पुत्र नहीं थे।
भगवान परशुराम की जन्म कथा Bhagwan Parshuram ki janm katha
भगवान परशुराम की कथा का उल्लेख कई पौराणिक ग्रंथों में है। बहुत समय पहले की बात है, कन्नौज नामक स्थान पर गाधि नामक राजा राज्य किया करते थे।
उनकी एक अत्यंत सुंदर पुत्री थी जिसका नाम था सत्यवती। महाराजा गाधि ने अपनी पुत्री सत्यवती का विवाह है महर्षि भृगु के पुत्र ऋषीक के साथ कर दिया था। जब सत्यवती के श्वसुर महर्षि भृगु पधारे तब महर्षि भृगु ने अपनी पुत्रवधू से वर मांगने के लिए कहा।
तब सत्यवती ने अपने लिए और अपनी माता के लिए पुत्र की कामना की। महर्षि भृगु ने दो चरू दिए और कहा जब तुम्हारी माँ और तुम ऋतु स्नान करने के बाद आओ तब तुम्हारी माँ पुत्र प्राप्ति की इच्छा लेकर पीपल के वृक्ष का आलिंगन करना है
और तुम्हें पुत्र की इच्छा लेकर गूलर के वृक्ष का आलिंगन करना है। इसके पश्चात इन दोनों चरुओं का अलग-अलग जाकर सेवन करना है, जिसमें सत्यवती की माता को क्षत्रिय पुत्र उत्पन्न होता और सत्यवती को ब्राम्हण पुत्र किंतु सत्यवती की माता को लगा कि महर्षि भृगु ने उत्तम संतान प्रदान करने के लिए सत्यवती को उत्तम चरू दिया है,
इसलिए उन्होंने सत्यवती के चरु को अपने चरू से बदल दिया और उसका सेवन कर लिया। महर्षि भृगु को इसका ज्ञान योग बल के द्वारा हो गया और उन्होंने सत्यवती को इस बारे में बताया तब सत्यवती ने कहा हे! महात्मा हे! तेजेश्वर आप हमें ऐसा
आशीर्वाद दीजिए कि मेरे पुत्र ब्राह्मण का आचरण करें और मेरा पौत्र भले ही क्षत्रिय का आचरण करें। इस प्रकार सत्यवती ने अपने पुत्र जमदग्नि को जन्म दिया, जिन्होंने ब्राह्मण का ही आचरण किया, किन्तु जमदग्नि के पुत्र परशुराम ने ब्राह्मण होते हुए भी क्षत्रिय का आचरण किया।
दोस्तों आपने यहाँ पर परशुराम किस जाति के थे (Parshuram kis jati ke the) के साथ अन्य तथ्य पड़े। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।
- FAQ for Parshuram
परशुराम का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
परशुराम का जन्म वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पुनर्वसु नक्षत्र में रात्रि के प्रथम प्रहर में उच्च के ग्रहों से युक्त मिथुन राशि पर राहु के स्थित रहते माता रेणुका के गर्भ से छत्तीसगढ़ राज्य के सरगुजा नामक जिले में घने जंगलों के बीच स्थित कलचा गांव में स्थित एक ऑर्कियोलॉजिकल साइट है, जिसे शतमहला कहा जाता है, में हुआ था।
क्या परशुराम की शादी हुई थी?
नहीं परशुराम के विवाह का उल्लेख किसी भी धर्मग्रन्थ में नहीं मिलता है।
परशुराम का असली नाम क्या है?
भगवान परशुराम का असली नाम राम था।
परशुराम का सबसे बड़ा शत्रु कौन है?
परशुराम का सबसे बड़ा शत्रु सहस्त्रबाहु था।
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