साइनोबैक्टीरिया के सामान्य लक्षण Cyanobacteria ke samanya Lakshan

साइनोबैक्टीरिया के सामान्य लक्षण

साइनोबैक्टीरिया के सामान्य लक्षण Cyanobacteria ke samanya Lakshan 

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, आज के इस लेख साइनोबैक्टीरिया के सामान्य लक्षण में। इस लेख के माध्यम से आप साइनोबैक्टीरिया क्या है

साइनोबैक्टीरिया के सामान्य लक्षण के साथ सायनोबैक्टीरिया के महत्व के बारे में जानेंगे। तो आइये दोस्तों शुरू करते है, यह लेख साइनोबैक्टीरिया के सामान्य लक्षण:-

थकान और कमजोरी के लक्षण

साइनोबैक्टीरिया के सामान्य लक्षण

साइनोबैक्टीरिया क्या है what is cyanobacteria 

साइनोबैक्टीरिया जिसे नील हरित शैवाल कहा जाता है, आरएच व्हिटेकर द्वारा वर्गीकृत किए गए पाँच जगत में से मोनेरा जगत के अंतर्गत आने वाला पृथ्वी का सफलतम जीव धारियों का समूह माना जाता है।

क्योंकि यह संसार के सभी भागों पर पाया जाता है। साइनोबैक्टीरिया अर्थात नील हरित शैवाल को जीवाणु भी कहा जाता है। क्योंकि इनकी कुछ संरचनाएँ जीवाणुओं से मिलती जुलती है।

साइनोबैक्टीरिया वे बहुकोशिकीय और एक कोशिकीय जीव होते हैं, जिनमें प्रकाश संश्लेषण वर्णक क्लोरोफिल उपस्थित होता है

और यह सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में अपने भोजन का निर्माण स्वयं करते हैं। सायनोबैक्टीरिया नील हरित शैवाल सामान्य जल, समुद्री जल नम चट्टान मिट्टी आदि प्रत्येक जगह पर पाए जाते हैं।

मोनेरा जगत के सामान्य लक्षण

साइनोबैक्टीरिया के लक्षण Cyanobacteria ke symptoms 

  1. साइनोबैक्टीरिया अर्थात नील हरित शैवाल सभी प्रकार के जल में पाए जाने वाले स्वपोषी क्लोरोफिल युक्त जीव होते हैं।
  2. नील हरित शैवाल या साइनोबैक्टीरिया प्रकाश संश्लेषण की क्रिया प्रदर्शित करते हैं, किंतु जल का प्रयोग हाइड्रोजन के स्रोत के रूप में इनके द्वारा किया जाता है।
  3. नील हरित शैवाल साइनोबैक्टीरिया की कोशिका भित्ति सैलूलोज द्वारा निर्मित होती है।
  4. साइनोबैक्टीरिया अर्थात नील हरित शैवाल में अलैंगिक जनन होता है। इनमें लैंगिक जनन नहीं पाया जाता
  5. साइनोबैक्टीरिया नील हरित शैवाल में विभिन्न प्रकार के कोशिकांग जैसे कि एंडोप्लास्मिक रेटिकुलम, माइटोकॉन्ड्रिया, गोलगी बॉडी आदि अनुपस्थित होते हैं।
  6. नील हरित शैवाल में अनुवांशिक पदार्थ के रूप में डीएनए पाया जाता है।
  7. साइनोबैक्टीरिया सभी प्रकार के वातावरण में जीवित रहने की क्षमता रखते हैं। इसलिए उन्हें आत्मनिर्भर स्वपोषी जीव माना जाता है।
  8. नील हरित शैवाल में असूत्री प्रकार का कोशिका विभाजन होता है।
  9. साइनोबैक्टीरिया में लिनोलिक अम्ल तथा गैलेक्टोज भी उपस्थित होता है।
  10. लाल सागर का लाल रंग ट्राइकोडेस्थियम एरीथ्रीयम नामक साइनो बैक्टीरिया के कारण होता है। 

साइनोबैक्टीरिया का महत्व और लाभ importance and benefits of cyanobacteria 

साइनोबैक्टीरिया का महत्व इस जगत में जितना मनुष्य के लिए है उससे कई अधिक अन्य जीवधारियों के लिए भी है। यह सत्य है की साइनोबैक्टीरिया ही वे जीव है

जिन्हे प्रथम ऑक्सीजनक प्रकाशसंश्लेषी जीव कहते है। साइनोबैक्टीरिया की क्रियाओं के द्वारा ही इस पृथ्वी पर ऑक्सीजन है।

वायुमंडल के निर्माण में साइनोबैक्टीरिया की सबसे अहम् भूमिका है। साइनोबैक्टीरिया के प्रमुख लाभ निम्नप्रकार है:-

कुछ साइनोबैक्टीरिया नाइट्रोजन स्थरीकरण करके मृदा की उर्वरता बढ़ाते है।

एनाबीना, ओसिलिटेरिया आदि साइनोबैक्टीरिया समुद्री जीव जंतुओं के लिए भोजन का स्त्रोत भी होते हैं।

साइनोबैक्टीरिया कवक, साइकस आदि जीव धारियों के साथ सहजीवी संबंध रखते हैं और उन्हें नाइट्रोजन युक्त प्राप्त कराते है।

राइबोजियम साइनोबैक्टीरिया नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है तथा दलहनी फसलों में रहता है और सहजीवी संबंध प्रदर्शित करता है।

जैविक खाद के रूप में नील हरित शैवाल का उपयोग मृदा की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता है.

दोस्तों इस लेख में आपने साइनोबैक्टीरिया के सामान्य लक्षण के साथ ही सायनोबैक्टीरिया के महत्व और लाभ के बारे में पढ़ा। आशा करता हूं यह लेख आपको अच्छा लगा होगा।

इसे भी पढ़े:-

  1. विषाणु क्या है, इसके प्रकार
  2. जीव विज्ञान की शाखाएँ
  3. कोशिका किसे कहते है

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