विषाणु क्या है, खोज, प्रकार, रोग what is virus, discovery, types, disease
विषाणु क्या है, खोज, प्रकार, रोग what is virus, discovery, types, disease
हैलो दोस्तों नमस्कार आपका बहुत - बहुत स्वागत है, हमारे इस लेख विषाणु क्या है, खोज, प्रकार, रोग (What is virus) में। दोस्तों इस लेख में आप विषाणु क्या है, विषाणु की खोज,
विषाणु की संरचना, विषाणु के प्रकार के साथ ही विषाणुओं से लाभ, हानि तथा विषाणु जनित रोग के बारे में भी जान पायेंगे। तो आइये दोस्तों शुरू करते है, आजका यह लेख विषाणु क्या है, खोज, प्रकार, रोग:-
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विषाणु क्या है what is virus
विषाणु वह सूक्ष्मतम अकोशिकीय प्रोकैरियोटिक (Prokaryotic) परजीवी न्यूक्लियो प्रोटीन से निर्मित जीव होता है, जिसे नग्न आंखों से नहीं देखा जा सकता।
विषाणु केवल जीवित कोशिका (Living Cell) में ही वृद्धि और विकास करता है, जबकि वह वाहय वातावरण मृत के समान होता है।
विषाणु का कोई कोशिकीय संगठन नहीं होता विषाणुओं को कई वर्षों तक इकट्ठा (Store) करके सुरक्षित रखा जा सकता है।
किंतु जब विषाणु जीवित कोशिका के अंदर प्रवेश करते हैं, तो वह अपने डीएनए (DNA) और आरएनए (RNA) के द्वारा जीवित कोशिका के डीएनए और आरएनए के संगठन में बदलाव कर देते हैं।
जिससे वह जीव कई प्रकार की बीमारियों से ग्रसित होने लगता है। विषाणुओं के अध्ययन को वायरोलॉजी (virology) या विषाणु विज्ञान कहा जाता है।
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विषाणु की खोज discovery of virus
विषाणु को अंग्रेजी में वायरस के नाम से जाना जाता है। सबसे पहले 1796 में एडवर्ड जेनर (Edward jenner) ने यह बताया था, कि चेचक एक विषाणु के कारण ही होने वाला रोग है।
इसके बाद एडोल्फ मेयर (Adolf Meyer) नामक वैज्ञानिक ने भी यह बताया कि तंबाकू में उपस्थित वायरस के कारण ही मोज़ेक नामक रोग होता है।
किन्तु रुसी वनस्पति वैज्ञानिक एवानोवस्की (Evanovsky) ने 1892 में तम्बाकू का विस्तृत अध्ययन किया और उसमें पाए जाने वाले विषाणु का अध्ययन किया और यह सिद्ध किया
कि तंबाकू में पाए जाने वाले विषाणु के द्वारा ही मोजेक नामक रोग होता है। लुई पाश्चर (Louis Pasteur) नामक वैज्ञानिक ने इसे जीवित तरल संक्रामक का नाम प्रदान किया।
जबकि बोर ने तम्बाकू के पत्ते पर इस विषाणु का प्रभाव देखा तथा मोजेक समान चिन्ह पाए जाने के कारण इस विषाणु का नाम टोबैको मोजैक वायरस (Tobacco mosaic virus) पड़ गया।
विषाणु की संरचना structure of virus
विषाणु अति सूक्ष्म अकोशिकीय परजीवी वे जीव होते हैं, जिनका कोई शारीरिक संगठन निश्चित नहीं होता। इसलिए विषाणुओ की संरचना अति सरल होती है।
विषाणुओ का निर्माण तीन प्रमुख संरचनाओं के द्वारा हुआ है, प्रोटीन, डीएनए या आरएनए किंतु जिस विषाणु में डीएनए (DNA) होता है,
उस विषाणु में आरएनए (RNA) नहीं होता और जिस विषाणु में आरएनए होता है उस विषाणु में डीएनए नहीं होता। डीएनए या आरएनए से एक संरचना निर्मित होती है, जिसे केंद्रीय कोर कहते है।
यह केंद्रीय कोर एक विशेष प्रकार की प्रोटीन के आवरण द्वारा ढकी रहती है जिसे कैप्सिड कहा जाता है, जबकि इस कैप्सिड का निर्माण कैप्सोमियर से होता है।
जो केप्सिड की इकाई है। सबसे छोटा विषाणु मुख और खुरपका विषाणु होता है जो 20 nm का होता है। जबकि सबसे बड़ा विषाणु तम्बाकू मोजेक विषाणु होता है, जो 300nm तक होता है।
विषाणु के प्रकार type of virus
विषाणु परजीवी होते हैं, और परपोषी प्रकृति प्रदर्शित करते हैं, विषाणुओं को परपोषी प्रकृति के आधार पर निम्न प्रकार में बांटा गया है:-
- पादप विषाणु Plant Virus
पादप विषाणु को अंग्रेजी में प्लांट वायरस (Plant Virus) के नाम से भी जाना जाता है। पादप विषाणु में न्यूक्लिक अम्ल RNA आरएनए होता है।
पादप विषाणु खोखले छड़ के समान होता है जिसकी लंबाई लगभग 3000 एंगस्ट्रोम (Angstrom) और व्यास लगभग 180 एंगस्ट्रोम तक हो सकता है।
इस विषाणु के चारों ओर से प्रोटीन का एक आवरण होता है, जिसे कैप्सिड (Capsid) कहते हैं। यह केप्सिड कई छोटी-छोटी इकाइयों, जिन्हें कैप्सोमियर्स (Capsomeres) कहते हैं, से निर्मित होता है।
विषाणु के कैप्सिड के निर्माण में लगभग 2100 कैप्सोमियर्स लगे होते है। यह सभी कुंडली के रूप में लगे हुए होते हैं।
इन कैप्सोमियर्स के अंदर खांचे होते हैं, जो वायरस की पूरी लंबाई में कुंडलाकार में व्यवस्थित रहते हैं। इसमें आरएनए (RNA) से निर्मित वलय,जो 6340 न्यूकिलियोटाइड से निर्मित होता है, धंसा रहता है। उदाहरण :- टी. एम. वी (TMV)
- जंतु विषाणु Animal Virus
जंतु विषाणु को अंग्रेजी में एनिमल वाइरस (Animal virus) कहा जाता है। इसमें न्यूक्लिक अम्ल DNA डीएनए किन्तु कभी-कभी आरएनए भी होता है।
इसमें डीएनए न्यूक्लिक अम्ल प्रोटीन से निर्मित संरचना द्वारा घिरा रहता है। जंतु विषाणु जीवधारियों में विभिन्न घातक रोग उत्पन्न करता है।
कियोकि यह मुख्यतः प्रतिरक्षा तंत्र को प्रभावित करता है. उदाहरण :- मम्पस वाइरस, इन्फलुएजा वाइरस एड्स वायरस आदि।
- बैक्ट्रीयोफेज Bacteriophage
इसे जीवाणुभोजी को बैक्ट्रीयोफेज (Bacteriophage) भी कहा जाता है। यह वे विषाणु होते है, जो केवल जीवाणुओ पर निर्भर रहते है।
इनमें न्यूक्लिक अम्ल डीएनए (DNA) होता है। इनकी संरचना मेढक के टेडपोल लार्वा से मिलती जुलती है। यह वाइरस गंगा नदी में पाया जाता है। उदाहरण :- टी-2 फेज (T-2 Phage)
विषाणुओं के निर्जीव होने के लक्षण Symptoms of nonliving viruses
- विषाणु कोशिका के रूप नहीं होते यह अकोशिकीय प्रोकैरियोटिक परजीवी जीव होते है।
- विषाणुओं को किसी भी बोतल में भरकर निर्जीव की तरह कई सालो तक रख सकते है।
विषाणुओं के सजीव होने के लक्षण symptoms of living viruses
- विषाणुओं के न्यूक्लिक अम्ल का द्विगुणन होता है, जो सजीवों का लक्षण है।
- विषाणु जब जीवित कोशिका में पहुँचते है, तो सजीवों की तरह व्यवहार करते है, और एंजाइम का संश्लेषण करते है।
विषाणुओं से लाभ Benifit of virus
विषाणुओं से विभिन्न प्रकार के लाभ होते है, जिनमें से विषाणुओं के मुख्य लाभ निम्नप्रकार से है:-
- विषाणु नील हरित शैवालों की साफ - सफाई करते है, जिससे नदी तथा जल स्रोतों पर फिसलन नहीं होती है।
- जीवाणुभोजी विषाणु जीवाणुओं को नष्ट करते है और जल को खराब नहीं होने देते है।
- विषाणुओं का लाभ जैव विकास के अध्ययन में भी होता है, कियोकि इनमें सजीव और निर्जीव दोनों के लक्षण पाए जाते है।
विषाणुओं से हानि loss of virus
विषाणुओं द्वारा कुछ ऐसी घातक बीमारियाँ फैलती है जिसका कोई इलाज ही नहीं है. विषाणुओं से प्रमुख हानियाँ निम्न प्रकार है:-
- पादप विषाणु पौधों (Plants) में अनेक प्रकार के रोग उत्पन्न कर देते है, जिससे कई वनस्पतियाँ नष्ट हो जाती है, जबकि कई वनस्पतियाँ तो लुप्त भी हो जाती है।
- तम्बाकू की पत्तियों में मोजेक रोग टोबेको मोजेक वायरस से होता है, जबकि केले में बंकी टॉप रोग बेनाना वाइरस-1 के कारण होता है, जिससे केले के उत्पादन में काफी गिरावट आती है।
- आलू में भी मोजेक रोग होता है, जिसका कारण पोटेटो मोजेक वायरस ही है।
- जंतु विषाणु जीवो में भी कई प्रकार के घातक रोग उत्पन्न कर देता है, जिनमें से चेचक, खसरा, पीत ज्वर, हार्पिज, रेबीज, एड्स, पोलियो आदि प्रमुख है।
विषाणु जनित रोग desease of virus
- खसरा - यह एक विषाणु जनित रोग है, जो पैरामिक्सो वायरस (Paramixo virus) से बच्चों में फैलता है। इस रोग में पूरा शरीर प्रभावित होता है।
- पीत ज्वर - पीत ज्वर अरबो नामक वायरस (Arbo virus) से फैलने वाला रोग है, जो अधिकतर मछरों के काटने से होता है।
- हार्पीज रोग - हार्पीज रोग रोग हार्पीज वायरस से होता है, जो सबसे अधिक बच्चों में फैलता है। यह रोग त्वचा और श्लेषकला को प्रभावित करता है।
- इंफ़्लूएन्जा रोग - यह विषाणु जनित रोग ऑर्थोमिक्सो वायरस (Orthomixo virus) से होता है, जो शवशन तंत्र को प्रभावित करता है।
- गलसूआ - यह रोग लार ग्रंथिओ को प्रभावित करता है। तथा जीवन में एक बार होता है।
- एड्स - यह एक घातक रोग है, जिसका पूर्ण नाम एड्स (Acquired Immune Deficiency Syndrome) है। यह रोग hiv ह्यूमन इम्युनो वायरस से होता है।
- पोलियो - पोलियो रोग पोलियो वायरस (Polio Virus) से मुख्यतः बच्चों में होता है। यह रोग तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है।
- चेचक - चेचक भी एक विषाणु जनित रोग होता है. जो वेरिसोला जोस्टर नामक वायरस के द्वारा फैलता है। इस रोग में पूरा शरीर प्रभावित होता है। चेचक के टीके का अविष्कार एडबर्ड (Edberd jenner) जेनर ने की थी।
दोस्तों इस लेख में आपने विषाणु क्या है, (what is virus) विषाणु की खोज विषाणु के प्रकार तथा रोग के बारे में पड़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।
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