भगवान विष्णु का तीसरा अवतार Bhagwan vishnu ka teesra avtar
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भगवान विष्णु का तीसरा अवतार Bhagwan vishnu ka teesra avtar
हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, आज के हमारे इस लेख भगवान विष्णु का तीसरा अवतार (God vishnu ka teesra avtaar) में।
दोस्तों इस लेख के माध्यम से आप भगवान विष्णु के तीसरे अवतार के बारे में जानेंगे, कि भगवान विष्णु का तीसरा अवतार कौनसा था
और भगवान विष्णु ने तीसरा अवतार किस लिए धारण किया था। तो आइए दोस्तों करते हैं, यह कथा शुरू भगवान विष्णु का तीसरा अवतार:-
भगवान विष्णु का वराह अवतार Bhagwan vishnu ka varah avtar
भगवान विष्णु का वराह अवतार तीसरा अवतार राक्षस राज हिरण्याक्ष का वध करने के लिए हुआ था। यह कथा उस समय की है, जब एक बार सनकादिक ऋषि भगवान विष्णु के दर्शन करने के लिए बैकुंठ गए।
भगवान विष्णु के द्वारपाल जय और विजय ने उन्हें रोक लिया और आने का कारण पूछा। तब सनकादिक ऋषियों ने कहा हे!
द्वारपाल हम भगवान विष्णु के परम भक्त हैं और भक्त भगवान के दर्शन करने के लिए ही आते हैं। इसलिए हमें भगवान के दर्शन करने के लिए अंदर जाने दीजिए।
किंतु अपने पद के अभिमान में चूर होकर जय और विजय ने सनकादिक ऋषियों को भगवान विष्णु के दर्शन करने के लिए बैकुंठ में प्रवेश नहीं करने दिया और कहा भगवान विष्णु अभी आराम कर रहे हैं।
जब सनकादिक ऋषियों को जय और विजय ने भगवान विष्णु के दर्शन के लिए नहीं जाने दिया तो ऋषियों ने जय और विजय को श्राप दे दिया कि वह तीन बार राक्षस योनि में जन्म लेंगे और भगवान विष्णु के द्वारा मृत्यु को प्राप्त होंगे।
इस कारण से जय ने महर्षि कश्यप की पत्नी आदिति के गर्भ से हिरण्याक्ष तथा विजय ने उसके छोटे भाई हिरणकश्यप देत्यों के रूप में जन्म लिया।
दोनों भाई अत्यंत बलवान अनीति, अधर्म पर चलने वाले राक्षस थे। जिनमें से हिरण्याक्ष का वध करने के लिए भगवान विष्णु ने वराह अवतार धारण किया था।
यह बात उस समय की है, जब दोनों हिरण्याक्ष और हिरण्यकशयप तीनों लोकों पर शासन करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने अनीति, अत्याचार,अधर्म का साम्राज्य स्थापित करना शुरू कर दिया।
मानव जाति पर घोर अत्याचार किए, चारों और आग, रक्त और तबाही का आतंक ही दिखाई दे रहा था। अंततः उसने पृथ्वी को सबसे पहले बंदी बनाने का सोचा
और पृथ्वी माँ का अपहरण करने के लिए पृथ्वी माँ के पीछे दौड़ा तभी पृथ्वी माँ भी उससे बचने के लिए भागने लगी। किंतु हिरण्याक्ष ने पृथ्वी माँ को पकड़ लिया
और पाताल लोक में बंदी बनाकर कैद कर दिया। तब पृथ्वी माँ ने भगवान श्री हरि विष्णु से प्रार्थना की और उनकी स्तुति करने लगी पृथ्वी माँ ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की हे! श्री हरि विष्णु मेरी रक्षा कीजिए,
मेरी रक्षा कीजिये हे! कृपानिधान यह दुरात्मा मानवता को पृथ्वी से सदा के लिए खत्म कर देगा। माँ पृथ्वी की पुकार सुनकर श्री हरि विष्णु ने वराह अवतार धारण किया और कीचड़ तथा गंदगी वाले स्थान
पर पहुँच कर भी माँ पृथ्वी को हिरण्याक्ष के चुंगल से आजाद कराया तथा हिरण्याक्ष का वध कर दिया। इस प्रकार से पृथ्वी माँ फिर से स्वतंत्र हो गई और पृथ्वी पर फिर से धर्म और मानवता का साम्राज्य स्थापित हो गया।
निष्कर्ष - दोस्तों आपने इस लेख में भगवान विष्णु के तीसरे अवतार (God vishnu ka teesra avtaar)) वराह अवतार की कथा पढ़ी। आशा करता हूँ आपको यह लेख अच्छा लगा होगा कृपया इसे शेयर जरूर करें।
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