वायुमंडल पर निबंध Essay on Atmosphere in hindi
वायुमंडल पर निबंध Essay on Atmosphere in hindi
हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, आज के हमारे इस लेख वायुमंडल पर निबंध (Essay on Atmosphere in hindi) में।
दोस्तों इस लेख के माध्यम से आज आप वायुमंडल के बारे में विभिन्न महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में जान पाएंगे, जैसे कि वायुमंडल क्या है?
वायुमंडल की परिभाषा और वायुमंडल की संरचना, वायुमंडल का संगठन के साथ ही कई ऐसे तथ्य जो आप नहीं जानते हैं, तो आइए दोस्तों पढ़ते हैं और बढ़ते हैं इस लेख में वायुमंडल पर निबंध:-
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वायुमंडल क्या है what is atmosphere
पृथ्वी के चारों और वायु का वह आवरण जो सभी चल - अचल वस्तुओं को घेरे हुए है वायुमंडल कहलाता है। पृथ्वी के चारों और कई किमी में फैली हुई गैसों का मोटा आवरण वायुमंडल कहलाता है। वायुमंडल में कई गैसों का मिश्रण धूल के कण पाए जाते है,
वायुमंडल ही जीवन (Life) का आधार है, कियोकि वायुमंडल में ओजोन परत उपस्थित रहती है, जो सूर्य से आने वाली पराबैगनी किरणों को पृथ्वी पर आने से रोकती है, तथा ऑक्सीजन प्राणवायु गैस भी वायुमंडल में उपस्थित रहती है।
वायुमंडल की परिभाषा Definition of Atmosphere
वायु अर्थात एक ऐसी राशि की संहति जो निरंतर बहती रहती है, वह पृथ्वी को चारों ओर से घेरे हुए अथवा हवा का वह घेरा जो पृथ्वी के गुरूत्व के कारण स्थानबद्ध रहता है। यह वायुराशि सूर्य की किरणों के हानिकारक प्रभाव से हमारी रक्षा करती है तथा पृथ्वी के तापमान (Temprature) को नियत रहने योग्य बनाती है।
वायुमंडल का संगठन Composition of Atmosphere
वायुमण्डल पृथ्वी के चारों और उपस्थित होता है और उसके बिना जीवन भी असम्भव है। वायुमंडल का संगठन ऊंचाई के आधार पर बदलता रहता है, जिसमें गैसों की मात्रा और तापमान होते है।
वैसे वायुमंडल के संगठन में 78.084% नाइट्रोजन गैस 20.94% ऑक्सीजन गैस 0.93% आर्गन गैस 0.030% कार्बनडाई ऑक्साइड गैस के साथ ही कुछ मात्रा में हाईड्रोजन, हीलियम, मीथेन गैसों के साथ धूलकण तथा जलवाष्प पाए जाते है।
वायुमंडल की संरचना Structure of Atmosphere
वायुमंडल को ऊँचाई के आधार पर निम्न पाँच प्रमुख परतों में बाँटा गया गया है:-
- क्षोभमंडल Troposphere
वायुमंडल की सबसे निचली परत को क्षोभमंडल के नाम से जाना जाता है। इसकी मोटाई ध्रुवों पर 8 किलोमीटर होती है, जबकि विषुवत रेखा पर इसकी मोटाई 16 किलोमीटर तक होती है। वायुमंडल की क्षोभमंडल परत में तापमान ऊँचाई के साथ घटता जाता है,
लगभग 165 मीटर की ऊंचाई पर 1 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान की कमी क्षोभमंडल में हो जाती है। वायुमंडल की पहली परत क्षोभमंडल में मौसम संबंधी सभी प्रकार की घटनाएँ जैसे की आंधी आना, बादल का गर्जना, वर्षा होना, बिजली चमकना, तूफान, इंद्रधनुष आदि जिन्हे प्राकृतिक घटनाएँ भी कहते है, होती है।
क्षोभमंडल को संवहनमंडल के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यहाँ पर संवहन धाराएँ लगातार बहती रहती हैं और इनके कारण ही तापमान और आद्रता काफी ऊंचाई तक गिर जाती है। क्षोभमंडल में एक स्थिति ऐसी भी होती है, जिसे हम क्षोभसीमा के नाम से जानते है,
जिसकी मोटाई लगभग 2 किलोमीटर तक होती है और यहाँ पर तापमान हमेशा नियत रहता है। अगर हम बात करें भूमध्य रेखा पर तो यहाँ पर -80 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान जबकि ध्रुवों पर -45 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान रहता है। वायुमंडल का लगभग 97% भाग वायुमंडल की पहली परत में लगभग 29 किलोमीटर तक की ऊंचाई तक पाया जाता है।
- समताप मंडल Stratosphere
वायुमंडल की दूसरी परत को हम समताप मंडल के नाम से जानते हैं। जहाँ पर मौसम साफ होता है, उसे हम समताप मंडल कहते हैं। समताप मंडल की ऊंचाई 50 किलोमीटर तक अर्थात 20 किलोमीटर से (क्षोभमंडल से ऊपर) लेकर 50 किलोमीटर तक होती है।
समताप मंडल में मौसम हमेशा साफ रहता है, यहाँ पर बादल नहीं पाए जाते वर्षा भी नहीं होती है, किंतु कभी-कभी दुर्लभ बाद दिखाई देते हैं, जिन्हें हम मदर ऑफ पर्ल (Mother of Pearl) के नाम से जानते हैं। समताप मंडल के थोड़ा ऊपर तापमान में वृद्धि होती है,
क्योंकि यहाँ पर ओजोन गैस (Ozon Gas) पाई जाती है और यह ओजोन गैस सूर्य से निकलने वाली पराबैगनी किरणों (Ultraviolet rays) को रोकने का काम करती है, इसकारण से वहाँ का तापमान बढ़ जाता है।
ओजोन परत को पृथ्वी का सुरक्षा वाल्व (Earth safety valve) के रूप में भी जाना जाता है। ओजोन परत का क्षरण सीएफसी (CFC) अर्थात क्लोरोफ्लोरोकार्बन गैस के कारण होता है और यह गैस एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर से निकलती है।
सीएफसी में उपस्थित क्लोरीन गैस ओजोन परत को नष्ट करने का कार्य करती है, जिससे पराबैंगनी किरणें पृथ्वी पर आ जाती हैं और विभिन्न प्रकार के रोगों का कारण बनती हैं। ओजोन परत की मोटाई को नापने में डाबसन इकाई (Dobson unit) का प्रयोग किया जाता है।
समताप मंडल एक ऐसा मंडल है, जहाँ पर वायु क्षेतिज दिशा में चलती है, और यहाँ पर हवाई वाहन चालकों के लिए उत्तम स्थान माना जाता है। समताप मंडल की सीमा को हम समताप सीमा के नाम से जानते हैं
- मध्यमंडल Mesosphere
मध्यमंडल वायुमण्डल की तीसरी परत होती है, जो लगभग 80 किलोमीटर की ऊंचाई तक पाई जाती है। इस परत में ऊंचाई पर जाने पर तापमान में गिरावट देखने को मिलती है और लगभग -100 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान तक गिरावट आ जाती है। मध्य मंडल की सबसे बाहरी सीमा को मध्य मंडल सीमा के नाम से जाना जाता है।
- आयनमंडल Ionosphere
मध्यमंडल के ऊपर वाली परत को आयनमंडल के नाम से जानते हैं, जो 80 किलोमीटर से लगभग 700 किलोमीटर तक की ऊँचाई पर फैली हुई है। वायुमंडल की इस परत में विभिन्न आवेशित विधुत कण उपस्थित होते हैं, इसी के कारण इस मंडल को आयनमंडल के नाम से भी जाना जाता है।
इस मंडल में विभिन्न प्रकार की तीन परतें होती हैं, जिन्हें हम (DEF) के नाम से जानते हैं और इन्हीं परतों के द्वारा रेडियो तरंगों को परावर्तित करके पृथ्वी पर भेजा जाता है, इसलिए आयन मंडल रेडियो प्रसारण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यहाँ पर संचार उपग्रह भी होते हैं, ध्रुवो पर लाल रंग की अरोरा की चमक आयन मंडल के कारण ही होती है. उत्तरी प्रकाश ध्रुव तथा दक्षिणी प्रकाश ध्रुव यहीं पर होता है।
- बाह्यमंडल Exosphere
आयनमंडल के ऊपर तथा वायुमंडल की पांचवी परत को बाह्यमंडल के नाम से जानते हैं। वायुमंडल की यह परत 700 किलोमीटर से अनंत ऊंचाई तक पाई जाती है, जहाँ पर वायु काफी विरल हो जाती है। यहाँ पर तापमान बढ़ने लगता है और लगभग 5000 डिग्री सेंटीग्रेड तक पहुँच जाता है। इस परत में हाइड्रोजन और हीलियम दोनों गैसों की प्रधानता देखने को मिलती है।
वायुमंडल की विशेषताएँ Characteristics of the Atmosphere
- वायुमंडल की सबसे प्रमुख विशेषता होती है 'वायु' जो रंगहीन, गंधहीन और स्वादहीन होती है, क्योंकि यह विभिन्न प्रकार की गैसों का मिश्रण होती है। वायु के अंतर्गत नाइट्रोजन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, आर्गन लगभग 9 प्रकार की गैंसे जलवाष्प और धूल के कण पाए जाते हैं।
- वायुमंडल में चार प्रकार की गैसे प्रमुख रूप से पाई जाती हैं, जिनमें नाइट्रोजन 78% ऑक्सीजन 21% आर्गन 0.93% कार्बन डाइऑक्साइड 0.03% प्रमुख होती है, जिनमें ऑक्सीजन को प्राणवायु के नाम से जाना जाता है, जबकि ऑक्सीजन की उपस्थिति में ही दहन होता है तथा नाइट्रोजन की उपस्थिति में दहन धीमे-धीमे होता है।
- वायुमंडल सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों से पृथ्वी की रक्षा करता है तथा विकिरणो को अवशोषित करता है और वातावरण का तापमान नियत बनाए रखता है, जो की जीवधारियों और वनस्पतियों के लिए उपयुक्त होता है।
- विभिन्न वैज्ञानिकों के अनुसार वायुमंडल की ऊंचाई लगभग 8000 किलोमीटर है, किंतु वास्तविक वायुमंडल 1600 किलोमीटर तक ही होता है, क्योंकि 1600 किलोमीटर के बाद वायुमंडल विरल होता जाता है।
- वायुमंडल में जलवाष्प और गैसों को छोड़ने के बाद जो धूल के कण होते हैं, वे सौर विकिरण के परावर्तन प्रकीर्नण तथा अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- जलवाष्प वायुमंडल का बहुत महत्वपूर्ण तत्व है। यह आंशिक तौर पर सौर विकिरण तथा पार्थिव विकिरण को अवशोषित कर भूतल के तापमान को सम रखने में सहायक होती है। यह वायुमंडल में घनीभूत आद्रता के विविध रूपों जैसे बादल ,वर्षा ,कुहरा ,पाला ,हिम आदि का प्राप्त श्रोत है। जलवाष्प ही पृथ्वी के विभिन्न भागों में चलने वाली चक्रवातों प्रतिचक्रवातों तूफानों तड़ित झंझावात आदि को शक्ति प्रदान करता है।
वायुमंडल के कार्य Function of Atmosphere
- वायुमंडल पृथ्वी पर जीवन के लिए बहुत आवश्यक है कियोकि यह कुचालक प्रकृति का होता है, इसलिए यह दिन के समय अचानक ताप की वृद्धि को रोकता है और रात के समय यह बाहरी अन्तरिक्ष में ऊष्मा के पलायन को रोकता है। अतः कह सकते है, कि वायुमंडल पृथ्वी पर जीवों के जीवन के लिए कम्बल की तरह कार्य करता है।
- वायुमंडल में ऑक्सीजन गैस होती है जो प्राणवायु कहलाती है, इसकी अनुपस्थिति में जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है, जबकि वायुमंडल जलवाष्प भी प्रदान करता है, जो बाहरी सतह को शुष्क होने से बचाता है।
- वायुमंडल हमारी रक्षा भी करता है। वायुमंडल में उपस्थित ओजोन परत सूर्य से आने वाली पराबैगनी किरणों को रोकता है जिससे पृथ्वी पर जीवन संभव है।
- औसत ताप को संतुलित रखना वायुमंडल का ही कार्य है, इसके लिए कई ग्रीन हाउस गेसें इसमें पायी जाती है। इसके आलावा भी वायुमंडल के द्वारा विभिन्न ऐसे कार्य सम्पादित होते है, जिनके द्वारा पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व है।
उपसंहार Conclusion
वायुमण्डल अर्थात वायुमंडल जो हमें चारों और से घेरे हुए है, वह पृथ्वी पर जीवन का आधार है, अतः यह कहा जा सकता है, कि वायुमंडल बिना पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं है, इसलिए
प्रकृति द्वारा प्रदत्त अमूल्य वरदान वायुमंडल को हमें सुरक्षित, संरक्षित रखना होगा, ताकि आगे आने वाली पीढ़ी इसमें अपना जीवन ख़ुशी से बिता पाए।
दोस्तों आपने यहाँ पर वायुमंडल पर निबंध (Essay on Atmosphere in hindi) में पढ़ा। आशा करता हुँ, यह लेख आपको अच्छा लगा होगा।
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