हनुमान जी किस जाति के थे Hanuman ji kis jati ke the
हनुमान जी किस जाति के थे Hanuman ji kis jati ke the
हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख हनुमान जी किस जाति के थे (Hanuman ji kis jati ke the) में।
यहाँ आप हनुमान जी कौन थे? हनुमान जी के अवतार तथा उनका नाम हनुमान कैसे पड़ा जानेंगे। तो आइये शुरू करते है, यह लेख हनुमान जी किस जाति के थे:-
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हनुमान जी कौन थे Who was hanuman ji
हनुमान जी का जन्म त्रेता युग में हुआ था जिस युग में भगवान श्रीराम ने भी जन्म दिया था और हनुमान जी भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त थे।
हनुमान जी को अंजनेय, केसरीनंदन, मारुति, बजरंगबली, कई नामों से जाना जाता है। हनुमान जी अंजन प्रदेश के वानरराज केसरी और माता अंजनी के सबसे बड़े पुत्र थे। भगवान शिव के 11 वे रुद्र कहे जाने वाले हनुमान जी अपने आराध्य देव
भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त और कष्ट तथा भय के मुक्तिदाता है। हनुमान जी ने अपने भगवान श्री राम के कई कारज संवारे इसलिए भगवान श्री राम के सबसे प्रिय भक्तों में हनुमान जी का ही नाम आता है।
हनुमान जी के पिता कौन थे who was father of hanuman ji
हनुमान जी के पिता का नाम केसरी था, जो उस समय सुमेरु पर्वत पर राज्य किया करते थे, जिसे बाद में अंजन प्रदेश के नाम से भी जाना जाने लगा। पौराणिक धर्म ग्रंथों के आधार पर बताया जाता है, कि हनुमान जी के पिता केसरी देवताओं के गुरु बृहस्पति के पुत्र थे, जो महान तेजस्वी शूरवीर और बुद्धिमान थे।
महाराज केसरी का विवाह स्वर्ग लोक की एक अप्सरा जो श्राप के कारण वानरी में बदल गई थी के साथ हुआ था, जिनसे उन्हें 6 पुत्र उत्पन्न हुए जिनमें से सबसे बड़े थे हनुमान और हनुमान के बाद मतिमान, श्रुतिमान, केतुमान, गतिमान, धृतिमान का जन्म हुआ।
हनुमान जी किस जाति के थे Hanuman ji kis jati ke the
हनुमान जी को चारों युगों में विद्यमान भगवान के रूप में जाना जाता है, आखिर हनुमान जी किस जाति के हैं यह प्रश्न हमेशा ही उठता रहता है और विभिन्न पौराणिक ग्रंथों में भी हनुमान जी की जाति से संबंधित विभिन्न प्रकार के तथ्य देखने को मिलते हैं।
रिसर्च के अनुसार बताया जाता है, कि हनुमान जी का जन्म कपि नामक वानर जाति में हुआ था जो 12 से 15 हजार वर्ष पहले विलुप्त हो चुकी है, जबकि कुछ लोगों का मानना है, कि हनुमान जी आर्य जाति के थे,
तो बहुत से लोग यही मानते हैं, कि हनुमान जी वानर हैं, किंतु कई इतिहासकार और विद्वान यही मानते हैं, कि हनुमान जी कपि नामक जाति के थे, जो लगभग 900000 वर्ष पहले पृथ्वी पर विद्यमान थी और इसके सदस्य सामान्य मानव से बहुत मिलते-जुलते थे।
हनुमान जी के कितने अवतार हैं How many avtar of hanuman ji
हनुमान जी स्वयं भगवान शिव शंकर के 11वे रूद्र है, उनका सबसे विशाल रूप पंचमुखी हनुमान है। अपने इस विशाल रूप में उनके पांच विशाल मुख 5 दिशाओं की ओर हैं। पंचमुखी हनुमान के पांच मुखों में नरसिंह का मुख पूर्व दिशा की ओर,
गरुड़ का मुख पश्चिम दिशा की ओर, अश्व मुख उत्तर दिशा की ओर, वानर का मुख दक्षिण दिशा की ओर, जबकि वराह का मुख उर्द्ध दिशा की ओर है। पौराणिक धर्म ग्रंथों के आधार पर बताया जाता है,
कि हनुमान जी का अवतार जिसे पंचमुखी अवतार या रूप कहते है, बहुत ही कल्याणकारी होता है, जिसका पूजन अर्चन करने से बल, कीर्ति, आरोग्य तथा निर्भयता प्राप्त होती है।
हनुमान जी का नाम हनुमान कैसे पड़ा Hanuman ji ka naam hanuman kaise pada
हनुमान जी बचपन से बड़े ही नटखट स्वभाव के थे, उन्हें बचपन से ही भूख भी बहुत लगती थी और वह जो भी घर में मिलता चाहे वह कच्चा हो पक्का खा लेते थे। एक बार उनकी माताजी ने कहा कि तुम्हें हमेशा पके हुए फल ही खाना चाहिए, जो लाल होते हैं।
फिर क्या था दूसरे दिन जब हनुमान जी सो कर उठे तो उन्होंने आसमान में दूर भगवान सूर्य देव को लालिमा लिए होते हुए देखा तब हनुमान जी ने समझा आसमान में कोई फल दिखाई दे रहा है और वे उसी छण उस फल को खाने के लिए चल दिए।
हनुमान जी को इतनी भूख लगी थी, कि उन्होंने तपते हुए तेज सूर्य को निगल लिया। सूर्य को निगलते ही चारों ओर अंधेरा छा गया। जब इस बात का पता देवराज इंद्र को चला तो वह हनुमान जी के सामने प्रकट हो गए और हनुमान से सूर्य को छोड़ने के लिए कहा, किंतु हनुमान जी ने सूर्यदेव को नहीं छोड़ा।
अंततः विवश होकर इंद्रदेव ने हनुमान जी वज्र से से प्रहार किया, जिससे हनुमान जी मूर्छित होकर पृथ्वी पर जा गिरे। इस बात का ज्ञान जब पवनदेव को हुआ तो उन्होंने संपूर्ण सृष्टि से वायु को अपने अंदर खींच लिया जिसके प्रभाव से पशु पक्षी जीव जंतु मनुष्य प्राणी सब निर्बल होकर धरती पर बेहोश होकर गिरने लगे।
ऐसे में सभी देवी देवता घबरा गए और वह भगवान ब्रह्मा के पास पहुंचे। भगवान ब्रह्मा ने अपनी शक्ति के द्वारा देखा की पवन ने अपने आप को किसी गुफा में बंद कर लिया है और उन्होंने संपूर्ण वायु को अपने अंदर समाहित कर लिया है
इसलिए ब्रह्मा सहित सभी देवी देवता उस गुफा में पवन देव के पास पहुंचे और इस घटना का कारण जाना। जब देवताओं को पता चला, कि हनुमान पवन देव के ही पुत्र हैं, तो इंद्र को पश्चाताप हुआ फिर भगवान ब्रह्मा ने हनुमान जी की मूर्छा को दूर किया।
भगवान ब्रह्मा ने तथा देवी देवताओं ने अनेक प्रकार के अस्त्र-शस्त्र तथा वरदान हनुमान जी को दिए। ब्रह्मा जी ने कहा कि देवराज इंद्र के वज्र से हनुमान जी की ठोड़ी अर्थात हनु पर प्रहार हुआ है, इसलिए आज से इन्हें हनुमान के नाम से जाना जाएगा तब से आज तक हनुमान जी को हनुमान के नाम से जाना जाता रहा है।
दोस्तों आपने इस लेख में हनुमान जी किस जाति के थे (Hanuman ji kis jati ke the) के साथ अन्य कई महत्वपूर्ण तथ्यों को जाना। आशा करता हूँ, आपको यह लेख अच्छा लगा।
- FAQ for Hanuman ji
हनुमान जी का जन्म कहाँ हुआ था?
माना जाता है, कि हनुमान जी का जन्म झारखण्ड राज्य के छोटे से गाँव गुमला की एक अंजन नामक गुफा में हुआ था।
क्या हनुमान शिव हैं?
शिव पुराण में हनुमान जी को भगवान शिव शंकर का अवतार बताया गया है, जबकि कई अन्य ग्रंथो में भी भगवान शिव के 11 वें रूद्र का अवतार हनुमान जी को माना है।
हनुमान जी पृथ्वी पर कब तक रहेंगे?
रामायण तथा कई पौराणिक ग्रंथो के आधार पर बताया गया है, कि हनुमान जी कलियुग के अन्त तक पृथ्वी पर निवास करेंगे।
हनुमान बंदर थे या इंसान?
हनुमान जी कपि नामक बानर जाति के थे जो इंसानो से काफी मिलते -जुलते थे।
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