भारतीय संविधान पर निबंध हिंदी में Essay on indian constitution in hindi

भारतीय संविधान पर निबंध हिंदी में Essay on indian constitution in hindi 

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, आज के इस लेख भारतीय संविधान पर निबंध हिंदी में (Essay on Indian Constitution in hindi)। दोस्तों इस लेख में आप भारतीय सविधान जिसे भारतीय

कानून तथा नियमों की पुस्तक कहा जाता है, पर निबंध पड़ेंगे। यहाँ से आप कई महत्वपूर्ण तथ्यों को जान पायेंगे। तो आइये दोस्तों पढ़ते है, यह लेख भारतीय संविधान पर निबंध हिंदी में:- 

भारतीय संविधान पर निबंध

भारतीय संविधान पर निबंध हिंदी में Essay on indian constitution in hindi 

भारत में 26 नवम्बर को हर साल संविधान दिवस (Constitution Day) मनाया जाता है, क्योंकि वर्ष 1949 में 26 नवम्बर को संविधान सभा द्वारा भारत के संविधान को स्वीकृत किया गया था

जो 26 जनवरी 1950 को प्रभाव में आया। यह विश्व का सबसे लंबा लिखित और बेहतर संविधान है। भारत का सर्वोच्च कानून " भारत का संविधान" (Indian Constitution) के नाम से जाना जाता है। भारतीय संविधान की प्रस्तावना

के अनुसार भारत एक सम्प्रुभतासम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोक तांत्रिक, गणराज्य है। लोकतन्त्र वो शासनतन्त्र होता है,

जहाँ वास्तव में सामान्य जनता या उसके बहुमत की इच्छा से शासन चलता है। भारत स्वयः एक लोकतान्त्रिक गणराज्य (Democratic republic) है।

संविधान का वास्तविक अर्थ क़ानून के रूप में बने हुए मौलिक नियम और सिद्धांत है। संविधान, मूल सिद्धान्तों का एक समूह है, जिससे कोई राज्य या अन्य संगठन अभिशासित होते हैं।

वह किसी संस्था को प्रचालित करने के लिये बनाया हुआ संहिता (दस्तावेज) है। यह प्रायः लिखित रूप में होता है। लोकतंत्र का शाब्दिक अर्थ "लोगों का शासन" होता है "लोकतंत्र का अर्थ है

एक ऐसी जीवन पद्धति जिसमें स्वतंत्रता, समता और बंधुता समाज जीवन के मूल सिद्धांत होते हैं, डॉ भीमराव अंबेडकर। डॉ. भीमराव अम्बेडकर को भारत के संविधान का जनक (Father Of Indian Constitution) कहा जाता है।

भारत की आजादी के बाद कांग्रेस सरकार ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर को भारत के प्रथम कानून मंत्री (Law Minister) के रूप में सेवा करने का निमंत्रण दिया।

उन्हें 29 अगस्त को संविधान की प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाया गया। वह भारतीय संविधान के मुख्य वास्तुकार थे और उन्हें मजबूत और एकजुट भारत के लिए जाना जाता है।

भारतीय संविधान का पहला वर्णन ग्रामविले  ऑस्टिन (Gramville Austin) ने सामाजिक क्रांति को प्राप्त करने के लिए बताया था। भारतीय संविधान के प्रति बाबा साहेब अम्बेडकर का स्थाई योगदान भारत के

सभी नागरिकों के लिए एक बहुत मददगार है। जब भारत के संविधान को अपनाया गया था तब भारत के नागरिकों ने शांति, शिष्टता और प्रगति के साथ एक नए संवैधानिक, वैज्ञानिक स्वराज्य

और आधुनिक भारत में प्रवेश किया था। भारत का संविधान पूरी दुनिया में बहुत अनोखा है, और संविधान सभा द्वारा पारित करने में लगभग 2 साल, 11 महीने और 14 दिन का समय ले लिया गया।

भारतीय संविधान और लोकतंत्र दोनों ही देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। देश के महान लोकतंत्र को सुरक्षित रखने में हमारे महान भारतीय संविधान की सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका है। संविधान हमारे लोकतंत्र की आत्मा है। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र

को एकता के सूत्र में बांधने वाला हमारा संविधान विस्तृत, विराट और अपने आप में अनोखा है। संविधान के महत्व का अनुमान हम इस बात से भी लगा सकते हैं कि देश के सर्वोच्च पद, चाहे विधायिका (Legislature) में हो,

कार्यपालिका (Executive) में अथवा न्यायपालिका (Judiciary) में सभी संविधान की ओर से दी गई शक्तियों एवं दायित्वों के अनुसार ही कार्य करते हैं। हमारा संविधान संघात्मक भी है और एकात्मक भी।

संविधान सभी को अवसर एवं जीवन की समानता का अधिकार देता है। संविधान में हमारे संविधान निर्माताओं की दूर-दृष्टि का समावेश है। संविधान हमें हमारे मूल अधिकार देता है, लेकिन इनके साथ ही संविधान हमें हमारे कर्तव्यों की शिक्षा भी देता है।

भारतीय संविधान की रचना कोई एक दिन की कहानी नहीं है। भारतीय संविधान में हर नीति, अधिकार और कर्तव्य को समझाया गया है। संविधान की नजर में सब एक समान है, सबके कर्तव्य एक समान है, संविधान हमारे अधिकारों को सुरक्षित रखता है।

हमारा देश एक धर्मनिरपेक्ष देश है। इसका तात्पर्य है कि यहाँ सभी धर्मों को समान रूप से स्वतंत्रता है। भारतीय संविधान एकता और राष्ट्रवाद के आदर्श को बढ़ावा देता है, हमारा संविधान हमें आर्थिक और व्यक्तिगत तौर पर मजबूती प्रदान करता है।

हमारे न्यायालय पूर्णत: स्वतंत्र हैं। उच्चतम न्यायालय का यह कर्तव्य है कि वह नागरिकों के मूलभूत अधिकारों और स्वतंत्रता पर आंच न आने दे। केन्द्र में अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रपति ही देश का प्रधान है, लेकिन वास्तविक सत्ता का उपयोग प्रधान मंत्री और उनका मंत्री मंडल करता है।

18 साल की उम्र के हर नागरिक को वोट देने का अधिकार है। वह किसी भी चुनाव में किसी भी उम्मीदवार के लिए वोट दे सकता है। राज्यों में राज्यपाल (Governor) प्रमुख है, लेकिन वास्तविक सत्ता मुख्यमंत्री (Chief Minister) और उसके मंत्रीमंडल में नीहित रहती है ।

केन्द्र व राज्यों के बीच अधिकारों और विषयों का साफ-साफ बंटवारा है, लेकिन केन्द्र अधिक शक्तिशाली है। हमारे संविधान में निहित समाजवादी व्यवस्था हमें यह विश्वास दिलाती है

कि राज्य के सभी आर्थिक, भौतिक या अभौतिक संसाधनों पर अंतिम रूप से राज्य का अधिकार होगा। यह किसी एक व्यक्ति के हाथ में केंद्रित नहीं होगा। लोकतांत्रिक सत्ता को निरंकुशवादी होने से बचाती है।

भारतीय संविधान अधिनियम में आने के बाद, भारत में महिलाओं को मतदान का अधिकार मिला है। दुनिया भर में विभिन्न देशों ने भारतीय संविधान को अपनाया है।

पड़ोसी देशों में से एक भूटान ने भी भारतीय लोकतांत्रिक प्रणाली को स्वीकार कर लिया है। हमारे देश का संविधान जहां एक ओर इतना सख्त है कि बनाये गए किसी भी कानून का सख्ताई के साथ

पालन करवाया जाता है। वहीं दूसरी ओर इतना लचीला की देश के नागरिक पारित किए गए कानून के खिलाफ अपील भी कर सकते हैं, जिससे स्पष्ट है, कि भारतीय संविधान और लोकतंत्र दोनों ही एक दूसरे के सहयोग और समर्थन के बिना अपूर्ण हैं।

हम संविधान दिवस को क्यों मनाते है भारत में संविधान दिवस 26 नवंबर को हर साल सरकारी तौर पर मनाया जाने वाला कार्यक्रम है जो संविधान के जनक डॉ भीमराव रामजी अम्बेडकर को याद और सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है।

भारत के लोग अपना संविधान शुरू करने के बाद अपना इतिहास, स्वतंत्रता, स्वतंत्रता और शांति का जश्न मनाते है। संविधान दिवस भारत के संविधान के महत्व को समझाने के लिए प्रत्येक वर्ष

26 नवंबर के दिन मनाया जाता है। जिसमें लोगो को यह समझाया जाता है कि आखिर कैसे हमारा संविधान हमारे देश के तरक्की के लिए महत्वपूर्ण है तथा डॉ अंबेडकर को हमारे देश के संविधान निर्माण में

किन-किन कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। आजादी के पहले तक भारत में रियासतों के अपने अलग-अलग नियम कानून थे, जिन्हें देश के राजनितिक नियम, कानून और प्रक्रिया के अंतर्गत लाने की आवश्यकता थी।

इसके अलावा हमारे देश को एक ऐसे संविधान की आवश्कता थी, जिसमें देश में रहने वाले लोगों के मूल अधिकार, कर्तव्यों को निर्धारित किया गया हो ताकि हमारा देश तेजी से तरक्की कर सके

और नयी उचाइयों को प्राप्त कर सके। भारत की संविधान सभा ने 26 जनवरी 1949 को भारत के संविधान को अपनाया और इसके प्रभावीकरण की शुरुआत 26 जनवरी 1950 से हुई।

संविधान दिवस पर हमें अपने अंदर ज्ञान का दिपक प्रज्जवलित करने की आवश्यकता है, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ीयों को हमारे देश के संविधान के महत्व को समझ सके, जिससे की वह इसका सम्मान

तथा पालन करें। इसके साथ ही यह हमें वर्तमान से जोड़ने का कार्य करता है, जब लोग जनतंत्र का महत्व दिन-प्रतिदिन भूलते जा रहे है।

यही वह तरीका जिसे अपनाकर हम अपने देश के संविधान निर्माताओं को सच्ची श्रद्धांजली प्रदान कर सकते है और लोगो में उनके विचारों का प्रचार-प्रसार कर सकते है। यह काफी आवश्यक है

कि हम अपनी आने वाली पीडियो को अपने देश के स्वतंत्रता संघर्ष और इसमें योगदान देने वाले क्रांतिकारियों के विषय में बताए ताकि वह इस बात को समझ सकें की आखिर कितनी

कठिनाइयों का बाद हमारे देश को स्वतंत्रता की प्राप्ति हुई है। संविधान दिवस वास्तव में वह दिन है जो हमें हमारे ज्ञान के इस दीपक को हमारे आने वाली पीढ़ीयों तक पहुंचाने में हमारी सहायता करता है।

भारत में संविधान दिवस कैसे मनाया जाता है? संविधान दिवस वह दिन है, जब हमें अपने संविधान के विषय में और भी ज्यादे जानने का अवसर प्राप्त होता है।

इस दिन सरकारी तथा नीजी संस्थानों में कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किये जाते है। संविधान दिवस के दिन जो सबसे महत्वपूर्ण कार्य किया जाता है वह है लोगो को “भारत के संविधान के प्रस्तावना" की

जानकारी देना, जिसके विषय में देशभर के विद्यालयों, कालेजों और कार्यलयों में समूहों द्वारा लोगो को काफी आसान भाषा में समझाया जाता है। इसके साथ ही विद्यालयों में कई तरह के प्रश्नोत्तर प्रतियोगिताएं,

भाषण और निबंध प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती है, जो भारत के संविधान और डॉ भीमराव अंबेडकर के उपर केंद्रित होती हैं। इसके साथ ही इस दिन कई सारे व्याख्यानों और सेमिनारों का भी

आयोजन किया जाता है, जिनमें हमारे संविधान के महत्वपूर्ण विषयों के बारे में समझाया जाता है। इसी तरह कई सारे विद्यालयों में छात्रों के लिए वाद-विवाद प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाता है,

जिसमें छात्रों द्वारा कई सारे विषयों पर चर्चा की जाती है। प्रत्येक वर्ष 26 नवंबर के दिन संविधान सभा का विशेष सत्र बुलाया जाता है,

जिसमें सभी राजनैतिक पार्टियों द्वारा डॉ.बी.आर.अंबेडकर को देश के संविधान निर्माण में अपना अहम योगदान देने के लिए उन्हें श्रद्धांजलि प्रदान करते है।

निष्कर्ष Conclusion 

के रूप में हम यह कह सकते हैं कि हमारे भारत देश के लिए भारतीय संविधान और लोकतंत्र दोनों ही अहम हैं। भारतीय संविधान के बिना लोकतंत्र अधूरा प्रतीत होता है। हम सभी को संविधान की पवित्र

भावना के अनुरूप कानून के मार्ग पर चलकर देश में शांति, सद्भाव और सामाजिक समरसता की भावना को और भी अधिक सुदृढ़ बनाना चाहिए।

हमें राष्ट्र और समाज के व्यापक हित में संविधान प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए उसमें बताए गए मूल कर्तव्यों में संविधान का पालन करना

और उसके आदर्शो तथा राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान सहित समस्त संवैधानिक संस्थाओं का आदर करना चाहिए। इसी में देश की खुशहाली और समृद्धि निहित है।

दोस्तों आपने इस लेख में भारतीय संविधान पर निबंध (Essay on Indian Constitution) पड़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।



  • FAQ For Indian Constitution





Q.1. भारत के संविधान का निर्माण कब हुआ?





Ans. भारत के संविधान का निर्माण प्रारूप समिति के गठन होने के बाद शुरू हो गया और 26 नवंबर 1949 में इसे भारत सरकार द्वारा अंगीकृत कर लिया गया।









Q.2. संविधान कितने दिन में बना?





Ans. भारत के संविधान के निर्मित होने में 2 वर्ष 11 महीने और 18 दिन का समय लगा था।









Q.3. भारत के संविधान का पिता कौन है?





Ans. भारत के संविधान के पिता या जनक डॉ भीमराव अम्बेडकर जी है, जो प्रारूप समिति के अध्यक्ष है।







  • इसे भी पढ़े:-

  1. आतंकवाद पर निबंध Essay on Terrorism
  2. ऑनलाइन शिक्षा पर निबंध Essay on online education
  3. सूखा आपदा पर निबंध Essay on Drought Disaster
  4. संविधान दिवस पर निबंध Essay on constitution day


Comments

Popular posts from this blog

महादेवी वर्मा का जीवन परिचय कक्षा 12 Mahadevi Verma ka Jivan Parichay class 12

केंद्रक की संरचना तथा कार्य Structure of nucleus and function

द्विनाम पद्धति के जनक कौन है Who is the father of binomial system