नवरात्री क्यों मनाते है कहानी why Navratri is celebrated Story
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नवरात्री क्यों मनाते है कहानी why Navratri is celebrated Story
हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, आज के हमारे इस लेख नवरात्रि क्यों मनाते हैं? why (Navratri is celebrated) नवरात्रि की कहानी (Story of Navratri) में।
दोस्तों नवरात्रि के बारे में आप सभी जानते हैं और आप में से बहुत से लोग नवरात्रि का त्यौहार बड़ी ही धूमधाम के साथ मनाते हैं, तो दोस्तों आइए जानते हैं कि यह नवरात्रि का त्योहार क्यों और कब से मनाया जाता है:-
नवरात्री क्यों मनाते है why Navratri is celebrated
नवरात्रि हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है, जो वर्ष में दो बार मनाई जाती है। एक नवरात्रि गर्मी में चैत्र माह में आती है, जबकि दूसरी नवरात्रि आश्विन माह में आती है।
नवरात्रि के उपलक्ष में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। पौराणिक कथाओं के आधार पर बताया जाता है, कि नवरात्रि का त्यौहार भगवान श्रीकृष्ण के वरदान स्वरुप मनाया जाता है।
जब भगवान श्री कृष्ण ने पृथ्वी पर जन्म लिया तो उन्होंने मायादेवी को भी पृथ्वी पर जाने के लिए कहा और कहा कि आपके बिना मेरी लीला संभव नहीं नहीं है, इसलिए आप माता यशोदा के गर्भ से जन्म लीजिये।
तब माया देवी ने कहा कि प्रभु में तुम्हारा इतना बड़ा काम करुँगी तो मुझे क्या मिलेगा? तब भगवान कृष्ण ने कहा कि मेरी पूजा वर्ष में एक बार जन्मआष्ट्मी को होंगी
किन्तु तुम्हारी पूजा वर्ष में दो बार नवरात्री के रूप में होंगी। भगवान श्री कृष्ण ने माता देवकी के गर्भ से जन्म लिया जबकि माया ने जन्म लिया यशोदा के गर्भ से।
जब वासुदेव भगवान कृष्ण को यशोदा के घर छोड़कर उनकी पुत्री को लेकर देवकी के पास आए तब कंस को देवकी की आठवीं संतान के बारे में पता चला कि उनकी आठवीं संतान बेटा नहीं बल्कि बेटी हुई है।
तब कंस ने उस बेटी को देवकी से छीन कर जमीन पर पटक दिया किंतु वह कन्या आकाश में उड़ गई और उसने अष्टभुजाओं वाला रूप धारण कर लिया जो माता दुर्गा का रूप था
और कहा हे! दुष्ट तुझे मारने वाला इस धरती पर अवतरित हो चुका है। तेरे पापों का अंत बहुत ही जल्द होने वाला है। अतः इस प्रकार माया देवी को ही नव दुर्गा का रूप माना जाता है,
तथा माता यशोदा को नौ पुत्रियों की माता तबसे ही नवरात्रि का पूजन वर्ष में दो बार किया जाता है। एक बार नवरात्रि सत्य पर विजय अनुष्ठान उपवास
तथा माता दुर्गा के प्रति श्रद्धा के लिए मनाई जाती है, तो दूसरी नवरात्रि भगवान श्री राम के जन्म उत्सव पर मनाई जाती है।
नवरात्री कैसे मनाते है How to celebrate navratri
नवरात्री वर्ष में दो बार मनाई जाती है। प्रथम नवरात्री चैत्र मास में तथा द्वितीय नवरात्री अश्विन माह में। नवरात्री के कुछ दिन पहले ही मंदिरों को अच्छे से सजाया जाता है।
बड़े - बड़े मंदिरो पर भक्तों के लिए मूलभूत व्यवस्थाएँ, जैसे महिला पुरुष को अलग - अलग प्रवेश की व्यवस्था आदि की जाती है। कई जगह घट खप्पर रखे जाते है जिनकी नित्य प्रति पूजा होती है।
मंदिरों में सुबह - शाम माँ की आरती तथा पूजा होती है, भक्ति के गीत गाये जाते है। नवरात्री में नौ दिन होते है जो सभी नौ देवियों को समर्पित होते है।
पहला दिन माँ शैलपुत्री का दूसरा दिन माँ ब्रम्हचारणी का तीसरा चंद्रघण्टा का चौथा माता कुष्मांडा पाँचवा स्कन्दमाता का छठवाँ माता कात्यायनी
सातवाँ कालरात्रि आठवाँ महागोरा तथा नौवाँ दिन माँ सिद्धिदात्री का होता है। माताएँ, बहिने तथा माँ दुर्गा के सभी भक्त नवरात्री में उपवास रखते है।
माँ के जागराते होते है, कई मंदिरो पर समाज के लोगों द्वारा भण्डारा कराया जाता है, कहीं - कहीं नौ दिनों तक रोज माँ का भंडारा होता है।
नवरात्री वाले दिन सभी लोग विशेष प्रकार के पकवान बनाते है और माँ दुर्गा की पूजा करते है। घट निकाले जाते है माता की शोभायात्राएँ निकाली जाती है।
अश्विन माह में माँ की मूर्तियाँ रखी जाती है, जहाँ नित्य आरती भजन माँ के गीत गाये जाते है, अर्थात चारों तरफ हर्ष और उल्लास दिखाई देता है।
नवरात्री की कहानी Story of Navratri
नवरात्री से सम्बंधित पौराणिक धर्म ग्रंथो में कई कहानियाँ है। यहाँ पर नवरात्री से सम्बंधित दो कहानियों का वर्णन किया गया है।
भगवान श्रीराम की कहानी Story of lord shriram
यह कहानी उस समय की बात है जब रावण और राम का प्रलयनकारी युद्ध चल रहा था। तब परमपिता ब्रह्मा ने भगवान श्रीराम से कहा कि वह माता चंडी की आराधना करें
जिससे उन्हें विजयी का आशीर्वाद मिलेगा। भगवान श्रीराम ने माता चंडी की विधिवत आराधना करने के लिए 108 दुर्लभ नील कमल पुष्पों को प्राप्त किया और विधिवत माता चंडी की आराधना करने लगे।
वहीं दूसरी तरफ लंकेश रावण ने भी माता चंडी की आराधना अमृत प्राप्त करने के लिए शुरू कर दी तथा भगवान श्रीराम की आराधना में विघ्न डालने के लिए रावण ने अपनी माया के द्वारा 108 दुर्लभ
नीलकमल में से एक नीलकमल को गायब कर दिया। अब माता चंडी की आराधना में एक नीलकमल पुष्प की कमी आ रही थी अतः आप भगवान श्रीराम का संकल्प पूरा नहीं हो सकता था
किंतु तभी भगवान श्रीराम को याद आया कि उन्हें स्वयं कमलनयन नव कंज लोचन के नाम से भी पुकारा जाता है। अतः उन्होंने अपनी एक आंख माँ चंडी को अर्पित करने के लिए निकालना चाहा
तब माँ चंडी उनकी इस आराधना और अनोखे अर्पण के कारण प्रसन्न होकर प्रकट हो गई और उन्होंने भगवान श्रीराम को विजय श्री का आशीर्वाद दिया
वहीं दूसरी तरफ रावण भी कई ब्राह्मणों के साथ मिलकर माता चंडी को प्रसन्न करने का प्रयत्न कर रहा था तभी पवन पुत्र हनुमान ने ब्राह्मण का रूप धारण किया
और रावण के उन ब्राह्मणों में जाकर माता चंडी के हवन में माता चंडी के श्लोकों का उच्चारण करने लगे तथा उन्होंने माता चंडी के श्लोकों का गलत उच्चारण करना शुरू कर दिया
जिससे माता चंडी रावण पर क्रोधित हो उठी और उन्होंने रावण के सर्वनाश का श्राप दे दिया। कहा जाता है, कि तभी से भगवान श्री राम ने माता दुर्गा
अर्थात माता चंडी की आराधना शुरू कर दी और वर्ष में दो बार नवरात्रि का त्यौहार जिनमें एक भगवान श्रीराम के जन्मदिवस पर मनाया जाने लगा।
माँ दुर्गा और महिषासुर की कथा Story of Maa Durga and Mahishasura
महिषासुर एक आदतायी असुर था जिसके पिता का नाम राक्षस राज रम्भ था। एक बार राक्षस राज रम्भ जल में रहने वाले एक भैंसा से प्रेम कर बैठा और इन दोनों के योग से ही महिषासुर का जन्म हुआ।
महिषासुर बचपन से ही विशालकाय आकृति वाला था। उसमें अनेक मायावी शक्तियाँ भी समाहित थी। इसके साथ ही महिषासुर परमपिता ब्रह्मा का बहुत ही बड़ा भक्त था उसने परमपिता ब्रह्मा की कठोर तपस्या की थी
और परमपिता ब्रह्मा ने तपस्या से प्रसन्न होकर उसे वरदान दिया था कि उसे कोई भी देवता और दानव नहीं मार सकता है।महिषासुर शक्ति के मद में आकार कई प्रकार के अनीति पूर्ण कार्य और अत्याचार करने लगा।
उसने सूर्य, चंद्र आदि पर विजय प्राप्त करके इंद्र समेत समस्त देवताओं को हरा दिया और स्वर्ग लोक पर अधिकार कर लिया।
महिषासुर के भय से सभी देवता इधर-उधर भागते फिर रहे थे कोई पृथ्वीलोक पर विचरण कर रहा था तो कोई पहाड़ियों और गुफाओं में छिपता फिर रहा था।
अंततः हार मानकर सभी देवताओं ने माँ दुर्गा की रचना की सभी देवताओं ने अपनी शक्तियाँ सभी अस्त्र-शस्त्र तथा वरदान माँ दुर्गा को प्रदान किए
जिससे माँ दुर्गा शक्तिशाली हो गई और उन्होंने महिषासुर को युद्ध के लिए ललकारा महिषासुर ने माँ दुर्गा का पहले तो बहुत उपहास उड़ाया
किंतु बाद में युद्ध करने लगा महिषासुर और माँ दुर्गा के बीच नौ दिनों तक युद्ध चला नौ वे दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर को उसके कर्मों की सजा दी और उसका अंत कर दिया।
दोस्तों आपने इस लेख में नवरात्री क्यों मनाते है? (why Navratri is celebrated) नवरात्री की कथा (Story of Navratri) पढ़ी। आशा करता हूँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।
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