कवि नागार्जुन का जीवन परिचय Biography of poet nagarjun

कवि नागार्जुन का जीवन परिचय Biography of poet nagarjun 

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख कवि नागार्जुन का जीवन परिचय (Biography of poet nagarjun) में। दोस्तों इस लेख द्वारा आज आप नागार्जुन कौन थे?

कवि नागार्जुन का साहित्यिक परिचय नागार्जुन की रचनाएँ नागार्जुन का भाव पक्ष कला पक्ष के साथ आप उनका साहित्य में स्थान भी जान पाएंगे। दोस्तों यह लेख कक्षा 8 से कक्षा 12 वीं तक के विधार्थियो के लिए बहुत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।

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कवि नागार्जुन का जीवन परिचय

कवि नागार्जुन का जीवन परिचय Biography of poet nagarjun 

नागार्जुन (Nagarjuna) एक प्रसिद्ध प्रगतिशील विचारधारा के भारतीय कवि हैं। उनका जन्म 30 जून 1911 गाँव सतलखा, मधुबनी, बिहार, भारत में हुआ था नागार्जुन का मूल नाम ठक्कन मिश्र था,

जबकि बाबा वैद्यनाथ की कृपा-प्रसाद मिलने के बाद उनका नाम वैद्यनाथ मिश्र हो गया। उनके पिता का नाम गोकुल मिश्र था, जो बड़े ही दयालु और भगवान शंकर के परम भक्त थे, जबकि उनकी माता का नाम उमा देवी था। नागार्जुन की पत्नी के

विषय में इतिहासकार एक मत नहीं है, किन्तु कुछ इतिहासकार उनकी पत्नी अपराजिता देवी को बताते है, जिनसे उन्हें दो पुत्रियों एवं चार पुत्रों की प्राप्ति हुई।

नागार्जुन की प्रारंभिक शिक्षा लघु सिद्धांत कौमुदी और अमरकोश के सहारे आरंभ हुई थी। बाद में वे बनारस चले गए और संस्कृत की शिक्षा प्राप्त करने लगे। उनका झुकाव कुछ समय बाद बौद्ध धर्म के प्रति हुआ और उन्होंने विद्यालंकार परिवेण' में जाकर बौद्ध धर्म की दीक्षा ली। कवि नागार्जुन ने संस्कृत हिंदी मैंथली कई भाषाओं में रचनाएँ लिखना शुरू कर दिया

नागार्जुन की स्थापत्य संस्कृत कविताओं में उनके समय के साहित्यिक संस्कृति और संस्कृत धर्म के बारे में जानकारी मिलती हैं। उनके कविताएं अधिकांशत: संस्कृत धर्म, तथ्य और अनुभव से जुड़ी हैं, जबकि कई स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया और जेल भी गए किन्तु उनके ह्रदय में देशभक्ति और देश के प्रति समर्पण की अटल भावना बनी रही।

नागार्जुन ने अपना जीवन देशभक्ति और देशहित में लगा दिया इसी बीच उन्हें दमा (Asthama) की शिकायत रहने लगी और उन्हें ठीक इलाज ना मिलने के कारण परलोक सिधारना पढ़ा।

कवि नागार्जुन की रचनाएँ Composition of Poet Nagarjun 

नागार्जुन ने कई भाषाओ में अधिकांशत: संस्कृत धर्म, तथ्य और अनुभव से जुड़ी रचनाएँ लिखी हैं। उनकी रचनाएँ मुख्यतः संस्कृत में लिखी गई हैं, लेकिन अंग्रेजी में भी उनके कविताएँ उपलब्ध हैं।

सबसे पहले नागार्जुन ने वाराणसी में रहते हुए वैदेही नाम से रचनाएँ लिखना शुरू कर दिया इसके बाद उनकी हिंदी रचनाएँ यात्री के नाम से छपना शुरू हो गयी।

नागार्जुन के कुछ प्रसिद्ध कविताएँ हैं जैसे:

कविता-संग्रह Kavita Sangrah 

  1. युगधारा 
  2. सतरंगे पंखों वाली 
  3. प्यासी पथराई आँखें
  4. तालाब की मछलियाँ
  5. तुमने कहा था 
  6. खिचड़ी विप्लव देखा हमने 
  7. हजार-हजार बाँहों वाली
  8. पुरानी जूतियों का कोरस 
  9. रत्नगर्भ 
  10. ऐसे भी हम क्या! ऐसे भी तुम क्या!
  11. आखिर ऐसा क्या कह दिया मैंने 
  12. इस गुब्बारे की छाया में 
  13. भूल जाओ पुराने सपने
  14. अपने खेत में

प्रबंध काव्य Prabandh Kavya 

  1. भस्मांकुर 
  2. भूमिजा

उपन्यास Upanyas 

  1. रतिनाथ की चाची 
  2. बलचनमा
  3. नयी पौध 
  4. बाबा बटेसरनाथ 
  5. वरुण के बेटे 
  6. दुखमोचन 
  7. कुंभीपाक
  8. हीरक जयन्ती 
  9. उग्रतारा
  10. जमनिया का बाबा
  11. गरीबदास

आलेख संग्रह Aalekh Sangrah 

  1. अन्नहीनम् क्रियाहीनम्
  2. बम्भोलेनाथ

बाल साहित्य Bal Sahitya 

  1. कथा मंजरी भाग
  2. कथा मंजरी भाग
  3. मर्यादा पुरुषोत्तम राम (बाद में 'भगवान राम' के नाम से तथा अब 'मर्यादा पुरुषोत्तम' के नाम से प्रकाशित)
  4. विद्यापति की कहानियाँ 

नागार्जुन कवि का भाव पक्ष Nagarjun Poet ka Bhav Paksh 

नागार्जुन (Nagarjuna) एक प्रसिद्ध भारतीय कवि उनके कविताएं अधिकांशत: संस्कृत धर्म, तथ्य और अनुभव से जुड़ी हैं। नागार्जुन की रचनाएँ मुख्यतः संस्कृत में लिखी गई हैं, लेकिन अंग्रेजी में भी उनके कविताएँ उपलब्ध हैं।

नागार्जुन के कविताओं में उनका भाव पक्ष धर्म, तथ्य और अनुभव से जुडा हुआ मिलता है। उनके कविताओं में आध्यात्मिक ज्ञान, सुख और आध्यात्मिक अनुभव से जुड़ी जानकारी दी गई है।

उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से किसान, दलित पीड़ित की विरह वेदना का वर्णन किया है। समाज में होने वाली विभिन्न घटनाओ बुराइयों को उन्होंने अपने काव्य के माध्यम से दर्शाया है। नागार्जुन की कविताओं में उनका भाव पक्ष संस्कृत धर्म और आध्यात्मिकता के संबंध में है।

नागार्जुन कवि का कला पक्ष Nagarjun Poet ka Kala Paksh 

नागार्जुन (Nagarjuna) का कला पक्ष संस्कृत कविता लेखन है। उनके कविताओं में संस्कृत भाषा का उपयोग किया गया है। उनकी रचनाएं मुख्यतः संस्कृत में लिखी गई हैं, लेकिन अंग्रेजी में भी उनके कविताएं उपलब्ध हैं।

नागार्जुन के कविताओं में उनका कला पक्ष धर्म, तथ्य और अनुभव से जुड़ी है। उनके कविताओं में बेहद शानदार तरीके से रुपक, उपमा, अतिश्योक्ति एवं अनुप्रास अलंकारों का प्रयोग करके आध्यात्मिक ज्ञान, सुख और अनुभव से जुड़ी जानकारी दी गई है। 

कवि नागार्जुन को पुरुस्कार Award given to Nagarjun 

कवि नागार्जुन को भारतीय साहित्य में योगदान के लिए कई पुरुस्कारों से नबाजा गया है, जो निम्न है:- 

  1. कवि नागार्जुन को साहित्य अकादमी पुरस्कार-1969 (मैथिली में, 'पत्र हीन नग्न गाछ' के लिए) प्रदान किया गया था।
  2. भारत भारती सम्मान (उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ द्वारा) कवि नागार्जुन को प्राप्त हुआ।
  3. मैथिलीशरण गुप्त सम्मान (मध्य प्रदेश सरकार द्वारा) प्रदान किया गया।
  4. नागार्जुन जी को राजेन्द्र शिखर सम्मान -1994 (बिहार सरकार द्वारा) प्राप्त हुआ।
  5. साहित्य अकादमी की सर्वोच्च फेलोशिप से सम्मानित
  6. राहुल सांकृत्यायन सम्मान पश्चिम बंगाल सरकार सेे प्राप्त हुआ।

नागार्जुन का साहित्य में स्थान Nagarjun ka sahitya me sthan 

नागार्जुन (Nagarjuna) एक प्रसिद्ध भारतीय कवि हैं, उनके कविताएं अधिकांशत: संस्कृत धर्म, तथ्य और अनुभव से जुड़ी हैं। नागार्जुन की रचनाएं मुख्यतः संस्कृत में लिखी गई हैं, लेकिन अंग्रेजी में भी उनके कविताएं उपलब्ध हैं।

नागार्जुन की रचनाएं संस्कृत साहित्य में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। उनके कविताओं में आध्यात्मिक ज्ञान, सुख और आध्यात्मिक अनुभव से जुड़ी जानकारी दी गई है, जबकि उन्होंने देशभक्ति की भावना में ओतप्रोत होकर देशहित में कई महत्वपूर्ण कार्य किए ऐसे महान साहित्यकार स्वतंत्रता सेनानी को हमेशा साहित्य में महान स्थान प्राप्त होगा।

दोस्तों आपने यहाँ पर कवि नागार्जुन का जीवन परिचय (Biography of poet nagarjun) कवि नागार्जुन का जीवन परिचय का साहित्य परिचय पढ़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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