कौशल्या रानी की कथा kaushalya rani ki katha in hindi



कौशल्या रानी की कथा story of kaushalya Rani 

हैलो दोस्तों आपका हमारे इस लेख कौशल्या रानी की कथा (Story of kaushalya Rani) में बहुत-बहुत स्वागत है। इस लेख में आप महारानी कौशल्या की कथा उनका जन्म तथा उनके माता-पिता के बारे में जानेंगे।

दोस्तों कौशल्या रामायण की एक प्रमुख पात्र तथा भगवान श्री राम की माता थी. जो पति परायण धर्म परायण तथा एक साहसी और निर्भीक महिला भी थी।

तो दोस्तों आइए दोस्तों जानते है, विस्तृत रूप से महारानी कौशल्या के बारे में इस लेख कौशल्या रानी (Story of Queen Kaushlya) की कथा में:-

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कौशल्या रानी की कथा

कौशल्या कौन थी who was kaushalya 

रानी कौशल्या राजा दशरथ की पहली रानी तथा रामायण की वह प्रमुख पात्र थी, जिसने श्रीराम को जन्म दिया। कौशल्या कौशल प्रदेश जो आज (छत्तीसगढ़) में है,की राजकुमारी थी।

कौशल्या का जन्म स्थान छत्तीसगढ़ में ही है. जहाँ पर आज कौशल्या मंदिर भी बना है। महाराजा दशरथ से विवाह करने के पश्चात काफी वर्षों के बाद कौशल्या ने दो संतानों को जन्म दिया था।

जिसमें एक संतान भगवान श्री राम और एक पुत्री थी जिसका नाम शांता था। महारानी कौशल्या के पिताजी का नाम राजा सुकौशल था जो कौशल देश के महाराज थे। तथा माताजी का नाम अमृतगाथा था।

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ऐसा माना जाता है, कि कौशल्या आदिति, शतरूपा का अवतार थी। तथा उनका नाम कौशल्या कौशल देश के नाम पर पड़ा।

कौशल्या रानी की कथा

कौशल्या के पिता का नाम kaushalya ke pita ka naam 

राजा दशरथ की पहली महारानी देवी कौशल्या थी। जिनका जन्म कौशल प्रदेश में हुआ था जो वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य में है।

कौशल्या रानी के पिता का नाम महाराज सुकौशल था। जो एक परमवीर योद्धा थे। उनके राज्य में चारों तरफ खुशहाली थी। महाराज सुकौशल अपनी प्रजा को अपने पुत्रों की भांति प्रेम करते थे।

कौशल्या के कितने पुत्र थे Kaushalya ke kitne putra 

महारानी कौशल्या महाराज दशरथ की पहली रानी थी। किन्तु उनको कोई संतान प्राप्त नहीं हुई। इस कारण महाराज दशरथ ने कैकई से विवाह किया।

किन्तु उन्हें भी लम्बे समय तक संतान का सुख प्राप्त नहीं हुआ। इसलिए उन्होंने एक और विवाह सुमित्रा से किया दुर्भाग्यवश उन्हें सुमित्रा से भी कोई संतान उत्पन्न नहीं हुई।

फिर एक बार उन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ करवाया जिसमें से खीर के चार दोने निकले इनमें से एक एक दौना की खीर कौशल्या और कैकई ने खाई

तथा दो दोनों की खीर सुमित्रा ने इसप्रकार से कौशल्या ने भगवान श्रीराम को जन्म डिया कैकई ने भरत को तथा सुमित्रा ने लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न को जन्म दिया। इस प्रकार माता कौशल्या का एक पुत्र राम था

जिसने कौशल्या की कोख से जन्म लिया था। किन्तु कौशल्या भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न को भी अपने पुत्र की भांति प्रेम करती थी। कौशल्या की एक पुत्री भी थी जिसका नाम शांता था। जो अपने ननिहाल रहती थी। 

राजकुमारी कौशल्या का विवाह Marry of kaushlaya

जब राजकुमारी कौशल्या विवाह के योग्य हुई तो उनके पिताजी महाराज सुकौशल को उनके विवाह की चिंता होने लगी और महाराज सुकौशल ने ने चारों दिशाओं में अपनी सुपत्री के लिए सुयोग वर खोजने के लिए दूंतों को भेजा

किंतु दुर्भाग्य से उसी समय महाराजा दशरथ ने अपना राज्य विस्तार के लिए कौशल देश में एक प्रस्ताव भेजा की कौशल देश महाराज दशरथ की मित्रता स्वीकार करें या फिर युद्ध के लिए तैयार हो जाएँ

सुकौशल के महाराजा इसे अपना अपमान समझा की अगर मित्रता स्वीकार करते है तो प्रजाजन समझेंगे की महाराज ने महाराज दशरथ के शौर्य तथा पराक्रम से भयभीत होकर मित्रता स्वीकार की है।

इसलिए अपने आत्मसम्मान के लिए महाराज सुकौशल ने युद्ध का रास्ता अपनाया और दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ महाराज सुकौशल ने अपने बहादुर सैनिकों के साथ महाराज दशरथ का डटकर सामना किया

अंततः महाराजा दशरथ ने राजा सुकौशल को पराजित कर दिया। किंतु महाराजा दशरथ ने महाराजा सुकौशल को अपने अधीन नहीं किया बल्कि मित्रता का हाँथ बढ़ाया

जिससे महाराजा सुकौशल बड़े ही प्रभावित हुये और उन्होंने इस मैत्री को संबंध में बदलने का प्रयत्न किया तथा अपनी पुत्री कौशल्या का विवाह महाराज दशरथ के साथ कर दिया।

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कौशल्या रानी की कथा story of kaushalya Rani 

पुराणों में बताया गया है, कि संसार की प्रथम स्त्री शतरूपा और प्रथम पुरुष मनु हैं। शतरूपा को ब्रह्मा जी ने अपने वामांग से उत्पन्न किया था।

पौराणिक धर्म ग्रंथों के आधार पर बताया जाता है, कि संसार की सृष्टि रचने के लिए ब्रह्मा जी ने अपने शरीर को दो भागों में विभक्त कर दिया था.

जिसमें से एक का नाम का और दूसरे का नाम या था और इन्हीं दो भागों से एक से पुरुष का जन्म हुआ था और दूसरे से स्त्री का जन्म हुआ था।

जिनमें से पुरुष का नाम था स्वयभुव मनु तथा स्त्री का नाम था शतरूपा। इन्हीं दोनों से इस संसार के समस्त मनुष्यों की उत्पत्ति हुई है। तथा मनु के नाम पर ही सभी मनुष्यों का नाम मानव पड़ा।  मनु और शतरूपा के सात  पुत्र और तीन कन्याएँ थी। 

इनका सबसे प्रिय पुत्र था उत्तानपाद इन्होंने कई वर्षों तक राज्य किया और राजकाज में व्यस्त होने के कारण इन्होंने प्रभु भक्ति की तरह बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया जब वे बिल्कुल वृद्धा अवस्था में पहुंच गए

तो उन्होंने अपना राज्य उत्तानपाद को शौंप कर प्रभु भक्ति की ओर अग्रसर हो गए और भगवान विष्णु के दर्शनों के आतुर हेतु उन्होंने भगवान विष्णु की तपस्या प्रारंभ कर दी तथा

नैमिषारण्य तीर्थ स्थान में पहुंचकर ओम नमो भगवती वासुदेवाय का जाप करने लगे। उन्होंने भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की इसमें उन्होंने फलाहार पर जीवित रहकर तपस्या की

कई वर्षों तक फलाहार पर जीवित रहकर तपस्या करने के बाद भी उन्हें कोई परिणाम प्राप्त नहीं हुआ तो उन्होंने केवल जल ग्रहण करके तपस्या शुरू कर दी।

किंतु इसके बाद उन्होंने जल तथा वायु को भी त्याग दिया और एक पैर पर खड़े होकर भगवान विष्णु के दर्शनों हेतु तपस्या करने लगे इसे देखकर भगवान ब्रह्मा विष्णु महेश तीनों आश्चर्यचकित रह गए।

उनकी तपस्या को भंग करने का भी प्रयास किया गया कई प्रकार के प्रलोभन दिए गए किंतु उन पर इस प्रकार के प्रलोभनों का कोई भी असर नहीं हुआ अंततः आकाशवाणी हुई हे - राजन हम आप दोनों की तपस्या से बड़े ही प्रसन्न हो हुये हैं

आप मनचाहा वर मांग सकते हैं। तब दोनों ने प्रभु दर्शन की अभिलाषा व्यक्त की और भगवान विष्णु ने अपने श्यामवर्ण विशाल रूप में प्रकट हो गए।

मनु और सतरूपा ने भगवान विष्णु को प्रणाम किया और उनके चरणों से लिपट गए भगवान विष्णु ने उन्हें उठाया और कहा आप अपना मनचाहा वर मांग सकते हैं।

महाराज मनु ने कहा कि हमारी एक यही प्रार्थना है कि आप जैसा पुत्र हमें आने वाले जन्म में प्राप्त हो इसके पश्चात सतरूपा ने भी यही वरदान मांगा भगवान विष्णु ने कहा

जब तुम दोनों अयोध्या के राजा दशरथ और कौशल्या रानी के रूप में जन्म लोगे तब मैं श्री राम के रूप में सातवें अवतार में तुम्हारे पुत्र के रूप में जन्म लूंगा इस प्रकार से कौशल्या महारानी शतरूपा का अवतार थी

जिन्हें पहले से ही भगवान विष्णु की माता होने का वरदान प्राप्त था। कौशल्या बचपन से ही धार्मिक प्रवृत्ति वाली थी जो नित्य भगवान की पूजा किया करती थी

और ब्राह्मणों को दान दिया करती थी महाराज दशरथ से विवाह के पश्चात उन्होंने श्री राम को जन्म दिया और भगवान विष्णु की माता कहलाने का गौरव प्राप्त किया।

दोस्तों आपने इस लेख में कौशल्या रानी की कथा (Story of queen kaushlya) पढ़ी आशा करता हूँ, यह कथा आपको अच्छी लगी होगी

इसे भी पढ़े :-

  1. राजा दशरथ की कहानी
  2. महर्षि विश्वामित्र की कथा
  3. माँ काली की कथा
  4. भगवान श्रीराम के 108 नाम





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